
रांची, 11 सितंबर 2026। झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (JUVNL) के अधीन कार्यरत करीब 7,000 मानव दिवस और आउटसोर्स कर्मियों की समस्याओं को लेकर झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ ने लंबे समय से लंबित वेतन और बोनस के भुगतान के साथ-साथ वर्षों से सेवा दे रहे कर्मियों के नियमितीकरण की मांग को प्रमुखता से उठाया है। संघ के अध्यक्ष अजय राय ने निगम के सीएमडी के. श्रीनिवासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए कर्मियों के हित में ठोस निर्णय लेने की मांग की है।
अजय राय का कहना है कि झारखंड की विद्युत व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में मानव दिवस और आउटसोर्स कर्मियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कर्मचारी लगातार बिजली व्यवस्था को संभालने में जुटे हैं। बिजली के पोल, लाइन, ग्रिड, फील्ड कार्य और उपभोक्ता सेवा जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में इन कर्मियों की भागीदारी रहती है। इसके बावजूद यदि इन्हें समय पर वेतन और बोनस नहीं मिलता है, तो यह केवल कर्मचारियों की समस्या नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा करने वाली स्थिति है।
संघ अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि मानव दिवस और आउटसोर्स कर्मचारी साल के 365 दिन अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। गर्मी की तपिश हो, बारिश का मौसम हो, आंधी-तूफान हो या फिर रात का समय, बिजली व्यवस्था में आई खराबी को दूर करने के लिए इन्हें मैदान में उतरना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि आम उपभोक्ताओं को लगातार बिजली उपलब्ध कराने और तकनीकी समस्याओं को दूर करने में इन कर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान है। इसके बावजूद उनके वेतन और बोनस में देरी होना गंभीर चिंता का विषय है।
अजय राय ने कहा कि जिन कर्मचारियों से नियमित कर्मचारियों की तरह काम और जिम्मेदारी ली जा रही है, उन्हें अधिकार और सुविधाएं देने के समय आउटसोर्स कर्मी बताकर अलग कर देना उचित नहीं है। उन्होंने इसे दोहरे रवैये का उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था को लंबे समय तक स्वीकार नहीं किया जा सकता।
झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ ने विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत कर्मियों को बोनस भुगतान में हो रही देरी पर भी सवाल उठाया है। संघ के मुताबिक निगम के अधीन अलग-अलग एजेंसियों में काम कर रहे कर्मचारियों को अब तक बोनस का समुचित भुगतान नहीं किया गया है।
इसके अलावा कई क्षेत्रों और एरिया बोर्डों में कर्मचारियों का वेतन भी लंबित होने की बात संघ ने कही है। संघ अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि जब कर्मचारी अपनी ड्यूटी और जिम्मेदारी समय पर पूरी कर रहे हैं, तो उनके मेहनताने का भुगतान समय पर क्यों नहीं किया जा रहा है।
अजय राय ने कहा कि एजेंसियों की लापरवाही का सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ता है, जो सीमित आय में अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। वेतन और बोनस में देरी होने से बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च, इलाज और अन्य जरूरी जरूरतें प्रभावित होती हैं।
उन्होंने निगम प्रबंधन से मांग की कि सभी संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए और जिन कर्मियों का बोनस या वेतन बकाया है, उसका तत्काल भुगतान सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही भविष्य में वेतन भुगतान में देरी न हो, इसके लिए एक प्रभावी निगरानी व्यवस्था भी विकसित की जाए।
संघ ने केवल वेतन और बोनस का मुद्दा ही नहीं उठाया है, बल्कि वर्षों से निगम की सेवा कर रहे मानव दिवस कर्मियों के भविष्य को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
अजय राय ने कहा कि बड़ी संख्या में कर्मचारी वर्षों से निगम की विद्युत व्यवस्था में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने अनुभव हासिल किया है और विभागीय कार्यप्रणाली से पूरी तरह परिचित हैं। ऐसे कर्मियों को लंबे समय तक अस्थायी व्यवस्था में रखना उनके भविष्य के साथ अन्याय है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी कर्मचारी का श्रम और अनुभव विद्युत व्यवस्था के लिए लगातार जरूरी है, तो उसे वर्षों तक अस्थायी या आउटसोर्स व्यवस्था में रखने के बजाय उसके रोजगार को स्थायी सुरक्षा देने पर विचार होना चाहिए।
अजय राय के मुताबिक निगम और उसकी अधीनस्थ कंपनियों में बड़ी संख्या में तृतीय एवं चतुर्थ वर्गीय पद रिक्त हैं। संघ का सवाल है कि जब विभाग में पद उपलब्ध हैं और दूसरी ओर वर्षों से अनुभवी कर्मचारी काम कर रहे हैं, तो इन दोनों परिस्थितियों के बीच संतुलन क्यों नहीं बनाया जा रहा है।
संघ ने मांग की है कि रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए और लंबे समय से सेवा दे रहे पात्र कर्मियों को उनके अनुभव का लाभ दिया जाए।
संघ ने वर्ष 2016 और 2018 की नियुक्ति प्रक्रिया की तर्ज पर कार्यानुभव को प्राथमिकता देने तथा पात्र कर्मियों को नियमानुसार आयु सीमा में आवश्यक छूट देने की मांग भी की है।
इसके अलावा वर्ष 2014 के सर्वे और संबंधित अभिलेखों में दर्ज वर्षों से कार्यरत कर्मियों के लिए विशेष नीति बनाने की मांग की गई है, ताकि लंबे समय से सेवा दे रहे पात्र कर्मचारियों को नियमित नियुक्ति का अवसर मिल सके।
झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ ने निगम प्रबंधन के समक्ष कई मांगें रखी हैं। इनमें निगम एवं उसकी अधीनस्थ कंपनियों में रिक्त तृतीय और चतुर्थ वर्गीय पदों पर नियमित नियुक्ति शुरू करना प्रमुख है।
संघ ने वर्षों से कार्यरत पात्र मानव दिवस कर्मियों के लिए न्यायसंगत नियमितीकरण प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की है। इसके साथ ही अधिसूचना संख्या-625 को समान नियम और समान अधिकार के सिद्धांत के आधार पर सभी पात्र कर्मियों पर समान रूप से लागू करने की मांग भी की गई है।
संघ के मुताबिक विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों के लंबित बोनस का तत्काल भुगतान कराया जाना चाहिए। जिन क्षेत्रों में वेतन लंबित है, वहां बकाया वेतन का भी अविलंब भुगतान होना चाहिए।
इसके अलावा आउटसोर्स व्यवस्था की समीक्षा कर वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों के अनुभव और योगदान को ध्यान में रखते हुए स्थायी रोजगार की ठोस नीति बनाने की मांग की गई है।
अजय राय ने कहा कि कर्मचारियों को लंबे समय से अलग-अलग स्तरों पर आश्वासन मिलते रहे हैं, लेकिन अब स्थिति ऐसी है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। कर्मचारियों को अपने भविष्य और आर्थिक सुरक्षा को लेकर स्पष्ट निर्णय चाहिए।
उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी गर्मी, बारिश, आंधी और रात-दिन की परवाह किए बिना विद्युत व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए मैदान में डटे रहते हैं, उनके परिवारों को वेतन और बोनस के लिए परेशान होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
अजय राय ने कहा कि आउटसोर्स व्यवस्था के नाम पर कर्मचारियों से लंबे समय तक कम लागत में काम लेने की नीति की समीक्षा जरूरी है। उनका कहना है कि समान कार्य के लिए सम्मानजनक वेतन, समय पर भुगतान और वर्षों की सेवा के अनुरूप रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
संघ अध्यक्ष अजय राय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निगम प्रबंधन ने बोनस, बकाया वेतन, नियमित नियुक्ति और वर्षों से कार्यरत मानव दिवस कर्मियों के नियमितीकरण जैसे मुद्दों पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की, तो संघ राज्यव्यापी आंदोलन को और व्यापक करेगा।
उन्होंने कहा कि विद्युत व्यवस्था को संभालने वाले हजारों कर्मचारियों की समस्याओं को नजरअंदाज कर व्यवस्था को लंबे समय तक सामान्य रूप से नहीं चलाया जा सकता। कर्मचारियों के धैर्य की भी एक सीमा होती है और अब वह सीमा समाप्त हो रही है।
अजय राय ने कहा कि झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ कर्मचारियों के अधिकार, सम्मान और रोजगार सुरक्षा की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाएगा। जरूरत पड़ने पर राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया और आंदोलन की स्थिति उत्पन्न हुई, तो इसके लिए निगम प्रबंधन जिम्मेदार होगा। संघ ने उम्मीद जताई है कि निगम प्रबंधन कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द सकारात्मक पहल करेगा और लंबित भुगतान तथा नियमित नियुक्ति से जुड़े मुद्दों पर ठोस निर्णय लेगा।
मुख्य मांगें: लंबित बोनस का भुगतान, बकाया वेतन का तत्काल निपटारा, रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति, अनुभवी कर्मियों को नियुक्ति प्रक्रिया में प्राथमिकता, आयु सीमा में आवश्यक छूट और वर्षों से कार्यरत मानव दिवस कर्मियों के लिए नियमितीकरण की नीति।