JSSC-CGL में आसनसोल तक पहुंचा कथित पेपर लीक का खेल, JPSC में कोचिंग संचालक गिरफ्तारBy Mid Time Bureau Tue, 15 September 2026 12:22 PM

झारखंड की दो बड़ी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच अब एक के बाद एक नए किरदारों तक पहुंच रही है। JSSC-CGL मामले में CID की SIT ने दिलीप कुमार पासवान को गिरफ्तार किया है, जबकि 14वीं JPSC परीक्षा से जुड़े मामले में शिवांगन कोचिंग के संचालक संजीत कुमार को पकड़ा गया है। दोनों मामलों में जांच एजेंसी परीक्षा में कथित गड़बड़ी के पीछे काम कर रहे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

JSSC-CGL मामले में दिलीप की गिरफ्तारी के बाद जुलाई से अब तक पकड़े गए आरोपियों की संख्या 12 हो गई है। CID के मुताबिक, दिलीप कथित तौर पर सिंडिकेट के संपर्क में था और अभ्यर्थियों को परीक्षा में अनुचित फायदा पहुंचाने की व्यवस्था करता था। जांच में सामने आया है कि परीक्षा से कुछ समय पहले कई अभ्यर्थियों को पश्चिम बंगाल के आसनसोल ले जाया गया था। आरोप है कि वहां उन्हें लीक प्रश्नपत्र के जवाब याद करवाए गए और इस पूरी व्यवस्था के बदले अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूले गए। CID के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों को आसनसोल के होटलों के अलावा दूसरे गुप्त ठिकानों पर भी रखा गया था।

दिलीप का स्थायी पता बिहार के जमुई का बताया गया है, जबकि वह पश्चिम बंगाल के अंडाल में रह रहा था। तलाशी और तकनीकी जांच में उसके पास से अभ्यर्थियों के साथ कथित आर्थिक लेन-देन से जुड़े डिजिटल और दस्तावेजी सबूत मिलने की बात CID ने कही है। अब इस जांच में एक और दिलचस्प पहलू सामने आया है। CID को खुद अभ्यर्थियों और आम लोगों से संदिग्ध उम्मीदवारों को लेकर जानकारी मिल रही है। शिकायतों में कुछ सफल अभ्यर्थियों के पुराने शैक्षणिक रिकॉर्ड, कथित संपर्क और परीक्षा में अचानक आए असामान्य अंकों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

पलामू, धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, लातेहार, रामगढ़, देवघर और कोडरमा समेत कई जिलों से ऐसी शिकायतें मिलने की बात सामने आई है। CID इन जानकारियों का मिलान कर रही है और संदिग्ध भूमिका मिलने पर सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ की जा रही है। अब तक करीब 500 अभ्यर्थियों और संदिग्ध लोगों से पूछताछ हो चुकी है। उधर, 14वीं JPSC परीक्षा की कथित धांधली की जांच में CID ने रांची के शिवांगन कोचिंग के संचालक संजीत कुमार को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, संजीत कथित तौर पर अभ्यर्थियों और परीक्षा से जुड़े सिंडिकेट के बीच संपर्क का काम करता था।

आरोप है कि कोचिंग के जरिए ऐसे अभ्यर्थियों को चिन्हित किया जाता था, जिनकी तैयारी कमजोर थी और फिर उन्हें सिंडिकेट के जरिए परीक्षा में फायदा दिलाने का सौदा तय किया जाता था। इसके बाद रकम लेकर अभ्यर्थियों को कथित तौर पर परीक्षा में सफल कराने की कोशिश की जाती थी।CID अब संजीत के कोचिंग नेटवर्क, बैंक खातों और उससे जुड़े दूसरे लोगों की भूमिका खंगाल रही है। इससे पहले शिवांगन कोचिंग में छापेमारी भी हो चुकी है। दोनों मामलों में अब जांच का दायरा सिर्फ पेपर लीक या परीक्षा के दिन की गड़बड़ी तक सीमित नहीं दिख रहा। CID कथित नेटवर्क, पैसों के लेन-देन, अभ्यर्थियों तक पहुंच और उन्हें परीक्षा में फायदा पहुंचाने वाली पूरी कड़ी को जोड़ने में जुटी है।