
JSSC-CGL परीक्षा के बाद हुई नियुक्तियों को रद्द करने के सरकार के आदेश को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। नियुक्ति रद्द किए जाने के फैसले से प्रभावित नवनियुक्त अफसरों की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने फिलहाल सरकार के आदेश पर लगी रोक को बरकरार रखा है। इससे JSSC-CGL के जरिए चयनित होकर नौकरी में आए सैकड़ों अफसरों को बड़ी राहत मिली है।
मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक रौशन की अदालत में हुई। नवनियुक्त अफसरों ने सरकार के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत JSSC की परीक्षाओं और JSSC-CGL के बाद हुई नियुक्तियों को लेकर कार्रवाई की गई थी। अदालत में निरोज कुमार खेस, रमेश उरांव समेत कई चयनित अभ्यर्थियों की ओर से याचिकाएं दाखिल की गई हैं। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने जवाब दाखिल करने के लिए कुछ और समय देने का अनुरोध किया। इस पर अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए लंबा वक्त देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने सरकार को 48 घंटे के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी। यानी फिलहाल चयनित अफसरों की नियुक्ति पर सरकार के फैसले को लेकर स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है और अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष सामने आने के बाद मामले की दिशा और साफ हो सकती है। सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच को लेकर भी मौखिक टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि उसे पुलिस पर पूरा भरोसा है, लेकिन शुरुआती जांच के बाद जांच की रफ्तार कुछ धीमी पड़ गई है। ऐसे में मामले की जांच और उससे जुड़े तथ्यों को लेकर भी अदालत की नजर बनी हुई है। नवनियुक्त अफसरों की ओर से पूर्व महाधिवक्ता और वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन, वरीय अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा समेत अन्य अधिवक्ताओं ने अदालत में पक्ष रखा। अब सबकी नजर 17 सितंबर की सुनवाई पर है, जहां सरकार को अपने जवाब के साथ अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा।