
छत्तीसगढ़ के बघुचित्त डांडिया घाटी हमले से जुड़े मामले में एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले में दोषी पाए गए 10 आरोपियों को मौत की सजा दी है। कोर्ट के मुताबिक, इन आरोपियों के प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) से जुड़े होने के साथ-साथ हमले की साजिश, रेकी और विस्फोटक सामग्री के इस्तेमाल से जुड़े अपराधों में उनकी भूमिका सामने आई।
यह फैसला एनआईए के केस आरसी-06/2013/एनआईए/डीएलआईआरएस में सुनाया गया है।
मौत की सजा पाने वाले 10 दोषियों के नाम
अदालत ने जिन 10 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई है, उनमें प्रतिलो मोडियम, चेतु लकमा उर्फ मुन्ना, मुजिबा उर्फ पूजन मोडियम, मुक्का माड़वी, कोसा कवासी उर्फ कोटासम, अयाता मड़काम, मड़कम देवा, जोगा मड़काम, चंपामी अन्ना उर्फ कमर उर्फ डेंगा और माड़देव ताग शामिल हैं।
किन धाराओं के तहत हुई सजा?
एनआईए की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अदालत ने इन दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149, 121, 121(क), 122, 341, 302, 307, 396, 397, 427 और 120(बी) के तहत दोषी माना।
इसके अलावा शस्त्र अधिनियम की धारा 25 और 27, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3, 4 और 5 और यूएपीए की धारा 16, 18, 20, 38, 39 और 40 के तहत भी दोष सिद्ध हुआ।
इन धाराओं में गैरकानूनी जमावड़ा, हथियारों से हमला, हत्या, हत्या के प्रयास, विस्फोटक का इस्तेमाल, आपराधिक साजिश और प्रतिबंधित संगठन से जुड़ी गतिविधियों जैसे अपराध शामिल हैं।
यानी इस मामले में अदालत के फैसले के बाद 10 दोषियों को अब मौत की सजा सुनाई गई है।