
रांची: करम पर्व को चर्च परिसर में मनाने को लेकर झारखंड में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। विवाद की वजह है चर्च परिसर में करम पर्व मनाए जाने की बात। आदिवासी समाज के कुछ संगठनों का कहना है कि करम पर्व उनकी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक पहचान से जुड़ा है। आरोप है कि चर्च में करम डाली को क्रूस के साथ स्थापित कर पर्व मनाने की कोशिश की जा रही है। इसी को लेकर विरोध के स्वर तेज हैं।
विरोध के बीच अब पूर्व मंत्री बंधु तिर्की का बयान सामने आया है, जिसने पूरे मामले को और गरमा दिया है। उनसे जब चर्च में करम पर्व मनाए जाने और इसे लेकर हो रहे विरोध पर सवाल किया गया, तो उन्होंने विरोध करने वालों पर ही निशाना साध दिया।
बंधु तिर्की ने कहा कि अगर इस मुद्दे पर कोई बुद्धिजीवी, शिक्षाविद या जानकार व्यक्ति अपनी बात रखता, तो उस पर चर्चा हो सकती थी। लेकिन उनके मुताबिक, “टपोरी लोग” इस तरह की फालतू बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ राजनीतिक टीआरपी बढ़ाने के लिए इस तरह की बातें करना उचित नहीं है।
बंधु तिर्की ने कहा कि असली सवाल यह होना चाहिए कि आदिवासी समाज अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और आस्था को कैसे बचाए। करम पर्व को लेकर लोगों को खुद समझना होगा कि अपनी परंपरा और मूल पहचान को किस तरह आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखा जाए।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अपनी आस्था और परंपरा को बचाने की कोशिश में ऐसा कोई काम नहीं होना चाहिए, जिससे किसी दूसरे की आस्था को ठेस पहुंचे। लेकिन करम पर्व को लेकर विवाद खड़ा करना और इसे लगातार बयानबाजी का मुद्दा बनाना भी उचित नहीं है।
यानी एक तरफ आदिवासी संगठन चर्च में करम पर्व मनाने को लेकर अपनी संस्कृति और परंपरा के सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ बंधु तिर्की ने विरोध करने वालों के एक वर्ग को “टपोरी” कहकर इस बहस को और तीखा कर दिया है। अब करम पर्व से पहले यह विवाद और बयानबाजी किस दिशा में जाती है, इस पर नजर बनी हुई है।