
Palamu: पलामू में एक कार्यक्रम के दौरान झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक बराबरी का मुद्दा उठाया। हिंदुत्व की राजनीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह खुद भी करीब चार-पांच साल तक इस विचारधारा से जुड़े रहे हैं, लेकिन उनके मन में आज भी यह सवाल है कि क्या समाज के हर वर्ग को धार्मिक स्थलों पर समान सम्मान और अधिकार मिल रहा है।
मंत्री ने कहा कि अगर हिंदुत्व और धर्म की बात की जाती है, तो समाज के पिछड़े और वंचित तबकों के साथ व्यवहार में भी बराबरी दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने मंदिरों में प्रवेश और वहां मिलने वाले सम्मान का उदाहरण देते हुए कहा कि गरीब या साधारण स्थिति में पहुंचने वाले लोगों के साथ कई बार अलग व्यवहार देखने को मिलता है।
राम मंदिर का जिक्र कर VIP व्यवस्था पर सवाल
अपने संबोधन में राधाकृष्ण किशोर ने राम मंदिर का भी उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि मंदिर का निर्माण और भगवान राम की आस्था से जुड़ाव अपनी जगह है, लेकिन क्या धार्मिक स्थलों पर हर व्यक्ति को एक जैसा सम्मान और अवसर मिल रहा है।
उन्होंने मंदिरों में VIP व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आम श्रद्धालुओं और समाज के कमजोर वर्गों के लिए भी वही सम्मान और सुविधा होनी चाहिए, जो प्रभावशाली लोगों को मिलती है। उनके बयान में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक समानता का सवाल प्रमुख रहा।
जाति की राजनीति पर भी मंत्री ने साधा निशाना
राधाकृष्ण किशोर ने जात-पात के आधार पर होने वाली राजनीति और सामाजिक विभाजन पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब तक जाति और धर्म के नाम पर भेदभाव खत्म नहीं होगा, तब तक समानता की बात पूरी तरह सार्थक नहीं होगी।
पलामू की राजनीति का उदाहरण देते हुए उन्होंने अलग-अलग सामाजिक समूहों के वोटिंग पैटर्न का जिक्र किया और कहा कि राजनीति को सिर्फ जातीय समीकरणों के चश्मे से देखने के बजाय जनता के वास्तविक मुद्दों और अधिकारों पर चर्चा होनी चाहिए।
मंत्री ने अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की राजनीति पर भी सवाल उठाए। उनके इस बयान के बाद हिंदुत्व, मंदिरों में समानता और जातीय राजनीति को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज होने की संभावना है।