हेमंत सोरेन पर आरोप तय होने के बाद JMM का पलटवार, मनोज पांडेय ने उठाए सबूतों पर सवालBy IANS Thu, 01 October 2026 04:20 PM

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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय होने के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के आरोपों पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के प्रवक्ता मनोज पांडेय ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि अदालत के सामने पेश किए गए सबूतों में कथित तौर पर हेरफेर किया गया है।

रांची की विशेष PMLA अदालत ने बुधवार को हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप औपचारिक रूप से तय किए। मामला रांची के बरियातू-बड़गाईं क्षेत्र की 8.86 एकड़ जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग आरोपों से संबंधित है। आरोप तय होने के साथ ही मामला अब ट्रायल के चरण में प्रवेश कर गया है।

IANS से बातचीत में मनोज पांडेय ने कहा कि जांच एजेंसी की ओर से अदालत में पेश किए गए सबूत "manipulated" हैं और पूरा मुकदमा कथित रूप से गलत साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अब मुकदमे के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी, अन्य साक्ष्य पेश किए जा सकेंगे और गवाहों के बयान दर्ज होंगे। पांडेय ने हेमंत सोरेन के निर्दोष होने का दावा करते हुए कहा कि अंततः अदालत का फैसला उनके पक्ष में आएगा।

JMM प्रवक्ता ने जमीन को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जिस जमीन को लेकर मामला है, वह कथित तौर पर हस्तांतरण और बिक्री योग्य नहीं थी, ऐसे में इसे हासिल करने का सवाल ही कैसे उठता है।

इस मामले में ED की जांच के बाद कुल 17 लोगों को आरोपी बनाया गया है। अदालत पहले ही अन्य 16 आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग चरणों में आरोप तय कर चुकी थी। हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया बुधवार को पूरी हुई।

ED के अनुसार, मामला जमीन के स्वामित्व और राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर, फर्जी दस्तावेजों तथा जमीन पर कथित अवैध कब्जे से जुड़ा है। एजेंसी ने अप्रैल 2024 में PMLA के तहत अभियोजन शिकायत दाखिल करते हुए 8.8 एकड़ से अधिक जमीन को कथित अपराध से अर्जित संपत्ति के रूप में जांच के दायरे में रखा था। ED ने उस समय जमीन का मूल्य करीब 31 करोड़ रुपये बताया था।

हालांकि, हेमंत सोरेन लगातार इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं। सितंबर में उन्होंने झारखंड हाई कोर्ट का रुख कर निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की थी। हाई कोर्ट ने तत्काल रोक नहीं लगाई, जिसके बाद विशेष PMLA अदालत में आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

अब मामला ट्रायल में जाएगा, जहां अभियोजन पक्ष अपने साक्ष्य और गवाह पेश करेगा तथा बचाव पक्ष को आरोपों का विरोध करने का अवसर मिलेगा। यानी आरोप तय होना मुकदमे का अंतिम फैसला नहीं है; मामले में आगे न्यायिक सुनवाई और साक्ष्यों का परीक्षण होना बाकी है।