दुर्गा पूजा समितियों ने सीएम हेमंत सोरेन को दिया पूजा पंडालों में आने का न्योताBy Mid Time Bureau Tue, 06 October 2026 06:08 PM

रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सोमवार को कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में रांची जिला दुर्गा पूजा समिति, रांची महानगर दुर्गा पूजा समिति और विभिन्न शांति समितियों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को चुनरी, मां दुर्गा की प्रतिमा और गुलदस्ता भेंट कर उनका अभिवादन किया तथा आगामी दुर्गा पूजा उत्सव में शामिल होने का निमंत्रण दिया।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने मुख्यमंत्री से कहा कि उनके नेतृत्व में दुर्गा पूजा समितियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। जिला प्रशासन की ओर से पूजा समितियों को पूरा सहयोग मिल रहा है। सदस्यों ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पूजा समितियों के साथ लगातार बैठकें कर उनकी समस्याओं का समाधान पूजा शुरू होने से पहले ही किया जा रहा है। इसके लिए समितियों ने मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के प्रति आभार जताया।

सपरिवार पूजा पंडालों में आने का न्योता

मुलाकात के दौरान दुर्गा पूजा समिति के सदस्यों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सपरिवार रांची के विभिन्न भव्य पूजा पंडालों का भ्रमण करने, मां दुर्गा के दर्शन करने और महाआरती में शामिल होने का आमंत्रण दिया। समितियों ने बताया कि इस वर्ष भी राजधानी में आकर्षक और भव्य पूजा पंडालों का निर्माण कराया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर भी व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने समितियों के आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करते हुए कहा कि वे इस वर्ष दुर्गा पूजा उत्सव में शामिल होंगे और विभिन्न पूजा पंडालों का भ्रमण कर मां दुर्गा का आशीर्वाद लेंगे।

पर्यावरण अनुकूल विसर्जन पर सीएम ने दिया जोर

मुख्यमंत्री ने दुर्गा पूजा समितियों के प्रतिनिधियों को कई अहम सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी श्रद्धा और उत्साह के साथ दुर्गा उत्सव की तैयारियां की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आस्था और परंपरा को कायम रखते हुए मूर्ति विसर्जन का कार्य पर्यावरण अनुकूल तरीके से किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मूर्ति विसर्जन के बाद तालाबों और अन्य जलाशयों की स्थिति पर्यावरण के लिए चुनौती बन जाती है। ऐसे में राज्य सरकार और पूजा समितियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर पर्यावरण अनुकूल विसर्जन की कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने पूजा समितियों से ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था विकसित करने का आग्रह किया, जहां आस्था और श्रद्धा के साथ पर्यावरण को भी सुरक्षित रखा जा सके।