
रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी गजेंद्र सिंह पटेल के बयानों पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि झारखंड में भाजपा के नए प्रभारी की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस से ही स्पष्ट हो गया है कि पार्टी के पास जनता को बताने के लिए अपना काम और उपलब्धियां नहीं हैं। इसलिए कांग्रेस और राज्य सरकार पर आरोप लगाना ही भाजपा का सहारा बन गया है।
राकेश सिन्हा ने कहा कि गजेंद्र सिंह पटेल झारखंड की जनता को उपदेश देने से पहले भाजपा के 11 वर्षों के शासन का हिसाब दें। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा ने अपने शासन में युवाओं को कितने रोजगार दिए, महंगाई से कितनी राहत दी और आदिवासी अधिकारों के मुद्दे पर उसका रिकॉर्ड क्या रहा।
उन्होंने कहा कि भाजपा युवाओं और छात्रों की चिंता का दिखावा करने के बजाय रोजगार और निष्पक्ष भर्ती के सवालों का जवाब दे। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी सिन्हा ने भाजपा से आरोपों के प्रमाण सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अलग-अलग मामलों में दोहरा मापदंड अपनाती है।
आदिवासी समाज के मुद्दे पर राकेश सिन्हा ने कहा कि झारखंड का आदिवासी समाज अपने जल, जंगल, जमीन, संविधान और अधिकारों को लेकर जागरूक है। उन्होंने भाजपा पर आदिवासियों को राजनीतिक रूप से बरगलाने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी को पहले अपने कार्यकाल में आदिवासी हितों के लिए किए गए कार्यों का हिसाब देना चाहिए।
घुसपैठ के मुद्दे पर भी उन्होंने भाजपा को घेरा। सिन्हा ने कहा कि यदि भाजपा के पास घुसपैठ से संबंधित ठोस प्रमाण और आंकड़े हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड को डर और अफवाह की राजनीति नहीं, बल्कि तथ्य और समाधान की जरूरत है।
SIR को लेकर भी सवाल: राकेश सिन्हा ने मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि किसी भी पात्र नागरिक का मताधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने भाजपा से पूछा कि राजनीतिक ध्रुवीकरण के बजाय वह यह सुनिश्चित करने की गारंटी क्यों नहीं देती कि किसी वास्तविक मतदाता का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से नहीं हटे।
कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अपराध गंभीर विषय है और सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए, लेकिन हर घटना को राजनीतिक बयानबाजी का मुद्दा बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। महिला सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के मामले में जवाबदेही की मांग करते हुए उन्होंने भाजपा से अपने शासन वाले राज्यों का रिकॉर्ड भी सार्वजनिक करने को कहा।
खनिज संपदा के मुद्दे पर सिन्हा ने कहा कि झारखंड केवल खनिज निकालने की जमीन नहीं है, बल्कि जल-जंगल-जमीन और आदिवासी अस्मिता की धरती है। भाजपा को राज्य के संसाधनों और राजस्व पर झारखंड के अधिकार को लेकर अपना स्पष्ट रुख बताना चाहिए।
अंत में राकेश सिन्हा ने कहा कि भाजपा के पास झारखंड के लिए ठोस एजेंडा नहीं है, इसलिए कांग्रेस का नाम लेकर राजनीति की जा रही है। उन्होंने गजेंद्र सिंह पटेल से अगली प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस की आलोचना की सूची के बजाय भाजपा का रिपोर्ट कार्ड पेश करने की मांग की। उन्होंने कहा कि भाजपा को रोजगार, महंगाई, झारखंड के अधिकार, आदिवासी हित और केंद्र की योजनाओं के साथ-साथ अपने 11 साल के शासन का भी हिसाब जनता को देना चाहिए।