
रांची, 10 अक्टूबर 2026: बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT), मेसरा में शनिवार को 36वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में स्नातक, स्नातकोत्तर, पीएचडी और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के कुल 2,984 विद्यार्थियों को डिग्री और डिप्लोमा प्रदान किए गए। समारोह के साथ ही विद्यार्थियों ने अपने शैक्षणिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा कर पेशेवर दुनिया की ओर कदम बढ़ाया।
वर्ष 1955 में स्थापित BIT मेसरा ने शिक्षा, शोध और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में सात दशक से अधिक का सफर पूरा किया है। इस दीक्षांत समारोह में संस्थान की शैक्षणिक विरासत के साथ देश की वैज्ञानिक और तकनीकी जरूरतों को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
कार्यक्रम में परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष और भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. अजीत कुमार मोहंती मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। BIT मेसरा के कुलाधिपति सीके बिड़ला और कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना समेत शिक्षक, विद्यार्थी, पूर्व छात्र और अभिभावक भी समारोह का हिस्सा बने। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और संस्थान की प्रार्थना के साथ हुई, जिसके बाद दीक्षांत समारोह की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई।
BIT मेसरा के कुलाधिपति सीके बिड़ला ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि डिग्री हासिल करने के साथ समाज के प्रति जिम्मेदारी भी बढ़ती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और अवसरों का इस्तेमाल समाज के लिए उपयोगी कार्य करने में करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल बदलाव और अंतरिक्ष तकनीक जैसे क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे हैं। ऐसे दौर में तकनीकी ज्ञान के साथ लगातार सीखने, बदलावों के अनुरूप खुद को तैयार करने और अलग-अलग विषयों के बीच तालमेल बनाकर काम करने की क्षमता भी जरूरी है।
सीके बिड़ला ने विद्यार्थियों को तकनीक का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने और अपने करियर में ईमानदारी, विश्वसनीयता तथा मजबूत मूल्यों को प्राथमिकता देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि चुनौतियां और असफलताएं भी सीखने का अवसर बन सकती हैं।
मुख्य अतिथि डॉ. अजीत कुमार मोहंती ने कहा कि भारत तकनीकी बदलाव के एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष विज्ञान, स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में प्रगति से नई संभावनाएं पैदा हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करना होगा। इसके लिए कुशल वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और उद्यमियों के साथ निरंतर शोध, विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के बीच सहयोग और मानव संसाधन में निवेश महत्वपूर्ण है।
डॉ. मोहंती ने BIT मेसरा की शोध और तकनीकी विकास में भूमिका का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से जिज्ञासु बने रहने, लगातार सीखने और अपने ज्ञान का उपयोग समाज के हित में करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता के साथ चरित्र और ईमानदारी भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
संस्थान के कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना ने कहा कि BIT मेसरा में शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच, जटिल समस्याओं का समाधान खोजने और ज्ञान को उपयोगी तकनीक में बदलने की क्षमता विकसित करना है।
उन्होंने बताया कि 1955 में स्थापना के बाद से संस्थान ने इंजीनियरिंग, विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है। संस्थान की शैक्षणिक और शोध गतिविधियों का दायरा भी नए क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहा है।
प्रो. मन्ना ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए संस्थान शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता और तकनीकी विकास को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्नातक होने वाले विद्यार्थियों से भविष्य में शोधकर्ता, उद्यमी, मार्गदर्शक और सहयोगी के रूप में संस्थान से जुड़े रहने की अपील की।
इस वर्ष के दीक्षांत समारोह में विभिन्न पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 113 पीएचडी शोधार्थी, 691 स्नातकोत्तर विद्यार्थी, 2,004 स्नातक विद्यार्थी और 176 डिप्लोमा प्राप्त करने वाले छात्र शामिल रहे। अपने-अपने पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल देकर भी सम्मानित किया गया।
डिग्री और डिप्लोमा हासिल करने वाले विद्यार्थी अब संस्थान के व्यापक पूर्व छात्र नेटवर्क का हिस्सा बन गए हैं। यह नेटवर्क देश और विदेश में उद्योग, शिक्षा, शोध तथा उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में कार्यरत पूर्व छात्रों को जोड़ता है।
समारोह का समापन अतिथियों के सम्मान और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। 36वें दीक्षांत समारोह ने विद्यार्थियों की उपलब्धियों का उत्सव मनाने के साथ उनके पेशेवर जीवन की नई शुरुआत का भी संदेश दिया।

