
रांची: भोजपुरी सिनेमा का नाम आते ही अक्सर फूहड़ गानों और दोहरे अर्थ वाले संवादों की चर्चा होने लगती है। लेकिन फिल्म ‘बोध’ इस पहचान से अलग अपनी कहानी और किरदारों के जरिए एक अलग तस्वीर पेश करती है। शनिवार को जागरण फिल्म महोत्सव के तहत रांची के जेडी हाई स्ट्रीट मॉल में फिल्म की स्क्रीनिंग हुई।
पटना के युवा फिल्मकार प्रशांत रंजन की लिखी, निर्मित और निर्देशित यह फिल्म कोरोना काल की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म में बिहार के शहरी जीवन से लेकर गांव के माहौल, खानपान, महाविद्यालय परिसर और मीडिया की दुनिया तक की झलक देखने को मिलती है।
‘बोध’ की खासियत यह है कि कहानी को प्रभावी बनाने के लिए फूहड़ गानों या अश्लील दृश्यों का सहारा नहीं लिया गया है। फिल्म स्थानीय परिवेश और आम जिंदगी से जुड़े किरदारों के जरिए आगे बढ़ती है। इसके कई दृश्य ऐसे हैं, जिनमें दर्शकों को अपने आसपास की जिंदगी और रिश्तों की झलक मिल सकती है।
फिल्म में प्रोफेसर कैलाश का किरदार अनुशासन, जिम्मेदारियों और पारिवारिक रिश्तों के बीच खड़े एक पिता की कहानी सामने लाता है। वहीं, रोहित-1 और रोहित-2 जैसे किरदार बच्चों की मासूमियत, उनकी छोटी-छोटी खुशियों और आजादी की चाह को दिखाते हैं। इन किरदारों के जरिए परिवार, जिम्मेदारी और अपनों से दूर होने का दर्द भी कहानी का हिस्सा बनता है।
फिल्म की शूटिंग बिहार में ही स्थानीय कलाकारों के साथ की गई है। इसका बड़ा हिस्सा राजधानी पटना में फिल्माया गया है। बिना बड़े सितारों और भारी-भरकम कलाकारों के बनी ‘बोध’ अपनी कहानी और सहज अभिनय के जरिए दर्शकों तक पहुंच रही है। जागरण फिल्म महोत्सव के तहत रांची में हुई इसकी स्क्रीनिंग ने स्थानीय दर्शकों को भी इस फिल्म से रूबरू होने का मौका दिया।