फहीम खान से अनिल शर्मा तक, 53 कैदियों की रिहाई पर लगा ब्रेक; झारखंड सरकार ने क्यों ठुकराए प्रस्ताव?By Mid Time Bureau Tue, 13 October 2026 02:32 PM

Ranchi: झारखंड की जेलों में उम्रकैद की सजा काट रहे 53 कैदियों को समय से पहले रिहाई नहीं मिलेगी। राज्य सजा पुनरीक्षण परिषद ने इन सभी कैदियों की रिहाई के प्रस्ताव खारिज कर दिए हैं। इनमें धनबाद के वासेपुर निवासी फहीम खान, रांची के अनिल शर्मा और सुरेंद्र बंगाली उर्फ सुरेंद्र सिंह रोतेला जैसे चर्चित नाम शामिल हैं। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अधिसूचना के मुताबिक, 30 जुलाई 2026 को हुई परिषद की बैठक में इन प्रस्तावों पर विचार किया गया था।

फहीम खान, अनिल शर्मा और सुरेंद्र बंगाली को राहत नहीं

धनबाद के फहीम खान का मामला हत्या से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, झारखंड हाईकोर्ट ने 7 नवंबर 2025 के फैसले में सगीर हत्याकांड में उनकी उम्रकैद की सजा का उल्लेख किया था। परिषद के सामने रखी गई रिपोर्ट में पुलिस, जेल प्रशासन और प्रोबेशन अधिकारी की राय को रिहाई के प्रस्ताव के खिलाफ बताया गया।

वहीं, अनिल शर्मा के मामले में जेल के भीतर दूसरे कैदी की हत्या का जिक्र है। अधिसूचना के अनुसार, उनकी रिहाई से गैंगवार और सार्वजनिक शांति प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। दस्तावेज में पहले न्यायिक हिरासत से फरार होने का भी उल्लेख है।

सुरेंद्र बंगाली उर्फ सुरेंद्र सिंह रोतेला को फिरौती के लिए दो लोगों की हत्या के मामले में दोषी बताया गया है। परिषद ने अपराध की गंभीरता और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद उनकी समयपूर्व रिहाई के प्रस्ताव को भी मंजूरी नहीं दी।

नवल साहू समेत अन्य कैदियों की रिहाई का प्रस्ताव भी खारिज

इस सूची में लोहरदगा के नवल साहू का नाम भी शामिल है। अधिसूचना के मुताबिक, उन्हें अपनी बड़ी मौसी की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। परिषद ने अपराध की प्रकृति और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए उनकी समयपूर्व रिहाई का प्रस्ताव भी खारिज कर दिया।

 रिहाई के फैसले में किन बातों पर हुआ विचार?

जानकारी के मुताबिक, राज्य की अलग-अलग जेलों से 20 साल या उससे अधिक समय से उम्रकैद की सजा काट रहे कैदियों की समयपूर्व रिहाई के प्रस्ताव भेजे गए थे। इन पर निर्णय लेने से पहले संबंधित जिलों के डीसी और एसपी समेत अन्य अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई थी।

रिपोर्टों में कुछ कैदियों की रिहाई के बाद दोबारा अपराध होने, गैंगवार की आशंका और कानून-व्यवस्था पर असर पड़ने की चिंता जताई गई। परिषद ने अपराध की प्रकृति, संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट और उपलब्ध न्यायिक तथ्यों पर विचार करने के बाद सभी 53 प्रस्तावों को खारिज कर दिया। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने भी इस संबंध में अधिसूचना जारी की है।

इस फैसले के बाद इन 53 कैदियों को फिलहाल समयपूर्व रिहाई की राहत नहीं मिली है। हालांकि, प्रस्ताव खारिज होने का अर्थ उनकी मौजूदा सजा में किसी नए बदलाव की घोषणा नहीं, बल्कि समय से पहले रिहाई की मांग को मंजूरी नहीं मिलना है।