GST परिषद के फैसलों से छोटे कारोबारियों को राहत? प्रदीप वर्मा ने बताया मोदी सरकार का बड़ा कदमBy Mid Time Bureau Wed, 14 October 2026 04:20 PM

देश में छोटे व्यापारियों, खुदरा कारोबारियों और एमएसएमई सेक्टर को राहत देने के उद्देश्य से जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में लिए गए फैसलों को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने सरकार की पहल की सराहना की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार कारोबार को आसान बनाने और कर व्यवस्था को अधिक सरल बनाने की दिशा में काम कर रही है। उनके मुताबिक, इन सुधारों से छोटे व्यापारियों को अनुपालन संबंधी परेशानियों से राहत मिल सकती है और कारोबार के विस्तार के नए अवसर खुल सकते हैं।

कर नियमों में राहत और मुकदमेबाजी कम करने पर जोर

डॉ. प्रदीप वर्मा ने कहा कि छोटे कारोबारियों के लिए कर संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाना जरूरी है। उनके लेख के मुताबिक, जीएसटी परिषद ने गिरफ्तारी से जुड़े प्रावधानों में बदलाव, अभियोजन की सीमा बढ़ाने और सामान्य दंड घटाने की संस्तुति की है। इसमें अभियोजन की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने और सामान्य दंड को 25 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार रुपये करने का उल्लेख है। साथ ही, 10 हजार रुपये से कम के कर मामलों में नोटिस नहीं भेजने के प्रस्ताव को भी उन्होंने छोटे व्यापारियों के लिए राहत देने वाला कदम बताया।

रिटर्न प्रक्रिया आसान होने से बचेगा समय

डॉ. वर्मा के अनुसार, पांच करोड़ रुपये तक के सालाना कारोबार वाले व्यापारियों के लिए वार्षिक रिटर्न और तिमाही कर भुगतान की प्रस्तावित व्यवस्था से अनुपालन का बोझ कम हो सकता है। इससे छोटे कारोबारियों को बार-बार रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया में समय खर्च करने के बजाय अपने कारोबार और ग्राहकों पर ध्यान देने का अवसर मिलेगा।

ई-कॉमर्स और परिवहन व्यवस्था में सुधार की उम्मीद

उन्होंने कहा कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए दूसरे राज्यों में व्यापार करने की सुविधा छोटे दुकानदारों, महिला उद्यमियों और स्थानीय उत्पादकों के लिए नए बाजार खोल सकती है। इसके अलावा, माल परिवहन के दौरान वाहनों की जांच को पुख्ता खुफिया जानकारी और वरिष्ठ अधिकारियों की पूर्व अनुमति से जोड़ने के प्रस्ताव से लॉजिस्टिक्स की लागत घटाने और आपूर्ति व्यवस्था को तेज करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

रिफंड और कार्यशील पूंजी पर भी ध्यान

डॉ. प्रदीप वर्मा ने रिफंड प्रक्रिया में तेजी लाने के प्रस्ताव को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके लेख में 90 प्रतिशत पात्र रिफंड दावों को तीन कार्य दिवसों में सिस्टम के जरिए जारी करने और आवेदन स्वीकृति की समय-सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि समय पर रिफंड मिलने से छोटे कारोबारियों और एमएसएमई की कार्यशील पूंजी मजबूत हो सकती है। लेख में कर्मचारियों के स्वास्थ्य और जीवन बीमा, प्लांट-मशीनरी तथा इनपुट सेवाओं पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के दायरे में विस्तार का भी जिक्र किया गया है।

कारोबार में आसानी और महंगाई पर नियंत्रण का दावा

डॉ. वर्मा ने अपने लेख में घरेलू आपूर्ति पर प्रभावी औसत कर दर लगभग 13.13 प्रतिशत होने और जीएसटी से पहले की 14.5 प्रतिशत दर का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि कर व्यवस्था को सरल बनाने, आवश्यक वस्तुओं पर कम कर दरों और लॉजिस्टिक्स में सुधार से कारोबार को प्रोत्साहन मिलने के साथ महंगाई नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि छोटे व्यापारी देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनके लिए भरोसे पर आधारित, पारदर्शी कर व्यवस्था आर्थिक विकास को गति दे सकती है।