
गुमला: भारतमाला परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर गुमला जिले में विवाद सामने आया है। रायडीह थाना क्षेत्र के रघुनाथपुर गांव के रहने वाले मसीह प्रकाश खाखा ने आरोप लगाया है कि उन्हें मृत घोषित करते हुए कथित तौर पर फर्जी वंशावली तैयार की गई और जमीन के मुआवजे की राशि दूसरे लोगों के खातों में भेजने की कोशिश की गई। पीड़ित का दावा है कि इस मामले में एक करोड़ 29 लाख रुपये से अधिक की राशि का गबन किए जाने की आशंका है।
मसीह प्रकाश खाखा के मुताबिक, भारतमाला परियोजना के तहत अधिग्रहित जमीन के असली मालिक होने के बावजूद उन्हें अब तक मुआवजा नहीं मिला है। उन्होंने इस मामले को लेकर झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। उनका कहना है कि 14 मई 2026 को हाईकोर्ट की ओर से आदेश जारी किए जाने के बावजूद अब तक उन्हें राहत नहीं मिली है।
पीड़ित ने बताया कि उन्होंने गुमला के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और भू-अर्जन विभाग के अधिकारियों को मामले की जानकारी देते हुए जमीन से संबंधित दस्तावेज और हाईकोर्ट के आदेश की प्रति सौंपी है। इसके अलावा, एक जून 2026 को भू-अर्जन पदाधिकारी और उपायुक्त को रिमाइंडर भी दिया गया। हालांकि, उनके अनुसार अब तक मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
इस पूरे प्रकरण में परसा पंचायत के मुखिया स्माइल कुजूर पर कथित फर्जी वंशावली के सत्यापन में भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इसी वंशावली के आधार पर वास्तविक जमीन मालिक को मृत दर्शाकर दूसरे लोगों के नाम पर मुआवजे का दावा किया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना बाकी है।
मामले को लेकर मसीह प्रकाश खाखा ने मजदूर संघ सीएफटीयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष जुम्मन खान, दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के उपाध्यक्ष रजाक बक्स और गुमला जिला अध्यक्ष कृष्णा कुमार वर्मा को लिखित आवेदन सौंपा है। उन्होंने अपने परिवार को जमीन का मुआवजा दिलाने और कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष जुम्मन खान ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में परसा पंचायत के मुखिया से संपर्क करने की कोशिश की थी। उनके मुताबिक, मुखिया ने व्यस्त होने की बात कहकर फोन काट दिया। जुम्मन खान ने आरोप लगाया कि असली रैयत की जानकारी के बिना वंशावली का सत्यापन कर मुआवजे की राशि दूसरे लोगों के खातों में भेजी गई। उन्होंने जिला प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
विवादित जमीन का विवरण खाता नंबर 47 और प्लॉट नंबर 764, 766, 484, 467, 466 तथा 536 बताया गया है। पीड़ित के अनुसार, भारतमाला परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन का कुल रकबा 2 एकड़ 13 डिसमिल 33 है।
मसीह प्रकाश खाखा और मजदूर संघ ने जिला प्रशासन तथा भू-अर्जन विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक जमीन मालिक और उनके परिवार को मुआवजा दिलाने की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया जा सकता है।
अब सवाल यह है कि हाईकोर्ट के आदेश, जमीन के दस्तावेजों और मुआवजे के दावों की जांच के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है। फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक जांच और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।