
डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने भारत की आर्थिक विकास दर, बुनियादी ढांचे, डिजिटल अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र में हुए बदलावों को बताया विकास की प्रमुख वजह
वैश्विक स्तर पर जारी युद्धों, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने मोदी सरकार की नीतियों और आर्थिक सुधारों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। उनके अनुसार, बुनियादी ढांचे में निवेश, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा और डिजिटल सेवाओं का विस्तार देश की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की विकास दर पर नजर
डॉ. वर्मा के लेख के मुताबिक, यूरोप में संघर्ष और पश्चिम एशिया में तनाव का असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं, ऊर्जा बाजारों और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। ऐसे माहौल में भारत की विकास संभावनाएं उसे वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाती हैं।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के विकास दर संबंधी अनुमानों का हवाला देते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को रेखांकित किया। उनका कहना है कि भारत की घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियां देश को वैश्विक आर्थिक झटकों का सामना करने में मदद कर रही हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर और विनिर्माण पर सरकार का जोर
डॉ. वर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए उठाए गए कदमों को आर्थिक वृद्धि का प्रमुख आधार बताया। उन्होंने पीएम गति शक्ति, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति और पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों से देश में परिवहन, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक विकास को गति मिली है।
उन्होंने ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसी पहलों को घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने वाला बताया। साथ ही, उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI) के माध्यम से मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका का भी जिक्र किया।
डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इकोसिस्टम का उल्लेख
डॉ. वर्मा के अनुसार, डिजिटल इंडिया और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) जैसी पहलों ने देश में डिजिटल लेनदेन और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि कारोबार से जुड़े नियमों और अनुपालनों को सरल बनाने के प्रयासों से छोटे कारोबारियों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) और स्टार्टअप्स के लिए अवसर बढ़े हैं।
उन्होंने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी आर्थिक बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उनके मुताबिक, नवाचार, उद्यमिता और घरेलू बाजार की बढ़ती मांग देश की विकास क्षमता को मजबूत कर रहे हैं।
विपक्ष पर लगाए आरोप
अपने लेख में डॉ. वर्मा ने विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के कुछ वर्ग सरकार की विकास नीतियों को लेकर भ्रम फैलाने और देश की आर्थिक प्रगति को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने विदेशी मंचों और अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंकों से कथित समर्थन के जरिए भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।
हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में लेख में विशिष्ट साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। इसलिए इन्हें डॉ. वर्मा के राजनीतिक आरोपों के रूप में देखा जाना चाहिए।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
डॉ. वर्मा ने कहा कि भारत की मजबूत घरेलू मांग, बढ़ता मध्यम वर्ग, उद्यमियों की सक्रियता और नीतिगत सुधार देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा आर्थिक प्रगति इस दिशा में एक मजबूत आधार तैयार कर सकती है।
उनके अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक मजबूती और विकास की संभावनाएं देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करती हैं।