
बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्णब’ को लेकर मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है। तूफान की तीव्रता लगातार बढ़ रही है और आने वाले दिनों में इसके और शक्तिशाली होने की आशंका जताई गई है। इसके मद्देनजर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के आसपास के तटीय इलाकों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, झारखंड की राजधानी रांची में भी संभावित भारी बारिश को देखते हुए जिला प्रशासन सतर्क हो गया है।
मौसम विभाग के मुताबिक, चक्रवाती तूफान पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पूर्व-मध्य हिस्से में सक्रिय है। सोमवार सुबह 11:30 बजे तूफान 15.5 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 88.2 डिग्री पूर्वी देशांतर के आसपास मौजूद था। पिछले छह घंटों में यह करीब 13 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, तूफान उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ सकता है। इसके 28 अक्टूबर की सुबह तक आंध्र प्रदेश के तट पर बापटला और विशाखापत्तनम के बीच, यनम के आसपास पहुंचने की प्रबल संभावना है।
इस दौरान हवा की रफ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने का अनुमान है। वहीं, तेज झोंकों की गति 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। तट के नजदीक पहुंचने के समय तूफान के अति प्रचंड चक्रवाती तूफान की श्रेणी में रहने की आशंका है।
चक्रवात के आगे बढ़ने के साथ समुद्र में तेज हवाएं चलने और ऊंची लहरें उठने की आशंका है। ऐसे में तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। मछुआरों समेत समुद्र में जाने वाले लोगों को खास सावधानी बरतने को कहा गया है।
चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए रांची जिला प्रशासन भी अलर्ट मोड में है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 28 से 30 अक्टूबर के बीच रांची में लगातार बारिश हो सकती है। इससे शहर के निचले इलाकों और सड़कों पर जलजमाव की समस्या पैदा होने की आशंका है।
प्रशासन ने चेताया है कि भारी बारिश के कारण कच्चे मकानों, झुग्गी-झोपड़ियों और कमजोर संरचनाओं को नुकसान पहुंच सकता है। नदियों और बड़े नालों में पानी का स्तर बढ़ने के साथ निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति भी बन सकती है। इसके अलावा, खेतों में पानी जमा होने से खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
संभावित खतरे को देखते हुए उपायुक्त ने संबंधित विभागों को लगातार निगरानी रखने और जरूरी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
जिला प्रशासन के निर्देश के अनुसार, 28 से 30 अक्टूबर तक आपदा प्रबंधन, राजस्व, नगर निगम, पुलिस, स्वास्थ्य, बिजली और जल संसाधन समेत सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहना होगा।
निचले इलाकों, जलजमाव की आशंका वाले स्थानों, नदियों और बड़े नालों की नियमित निगरानी करने को कहा गया है। साथ ही, सड़कों और नालियों की सफाई तथा जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं।
कमजोर मकानों और झुग्गी-झोपड़ियों वाले क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने के साथ जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था करने को कहा गया है। किसानों को भी खेतों में जलजमाव से फसलों को बचाने के लिए जरूरी सलाह देने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने निचले और जलजमाव वाले इलाकों में रहने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। लोगों को अनावश्यक रूप से घरों से बाहर नहीं निकलने और नदियों, नालों व पानी भरे स्थानों के पास जाने से बचने की सलाह दी गई है। कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों को भी सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
किसी भी आपात स्थिति में नागरिक स्थानीय प्रशासन, पुलिस या आपदा नियंत्रण कक्ष से संपर्क कर सकते हैं।
प्रशासन ने बिजली कड़कने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए लोगों को गरज-चमक शुरू होते ही किसी पक्के मकान या सुरक्षित स्थान में शरण लेने की सलाह दी है।
तेज हवाओं के कारण पुराने पेड़, बिजली के खंभे और होर्डिंग्स गिर सकते हैं। ऐसे में इनके नीचे वाहन खड़े करने से बचने को कहा गया है। भारी बारिश के दौरान जलजमाव वाली सड़कों पर वाहन चलाने से भी परहेज करने की अपील की गई है।
इसके अलावा, आंधी-तूफान के समय बिजली के उतार-चढ़ाव और शॉर्ट सर्किट से बचने के लिए जरूरत के अनुसार मुख्य बिजली स्विच बंद करने और महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्लग निकालने की सलाह दी गई है।
फिलहाल, जिला प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। अधिकारियों को जरूरी तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम संबंधी चेतावनियों को गंभीरता से लें और किसी भी आपात स्थिति में आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।