
रांची: नई दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के भाषण के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री, उत्तर प्रदेश के सह-प्रभारी और राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने राहुल गांधी पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं का ठीकरा संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़ने की कोशिश कर रही है। ‘वोट चोरी’ के नाम पर निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाकर जनता के बीच अविश्वास पैदा करना गैर-जिम्मेदाराना राजनीति है।
डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने राहुल गांधी के उन आरोपों पर सवाल उठाए, जिनमें 2025-26 के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के आंकड़ों के आधार पर 2024 के लोकसभा चुनाव की वैधता पर सवाल खड़े किए गए हैं। उन्होंने कहा कि SIR के दौरान चिह्नित करीब 13.39 करोड़ मतदाता प्रविष्टियों में मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित और दोहरे पंजीकरण वाले मतदाता शामिल हैं। ऐसे में बाद में हुए मतदाता पुनरीक्षण के आंकड़ों को पिछले लोकसभा चुनाव में कथित ‘वोट चोरी’ का प्रमाण बताना तर्कहीन है।
उन्होंने कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया है तो पार्टी बूथवार साक्ष्य सामने रखे। डॉ. वर्मा ने यह भी दावा किया कि सर्वोच्च न्यायालय 27 मई 2026 को बिहार में SIR की वैधानिकता स्वीकार कर चुका है।
ज्ञानेश कुमार को लेकर राहुल गांधी के आरोपों पर भी उठाए सवाल
डॉ. वर्मा ने राहुल गांधी से आधिकारिक रिकॉर्ड देखने की सलाह देते हुए कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान राजीव कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त थे, जबकि ज्ञानेश कुमार ने 15 मार्च 2024 को चुनाव आयुक्त का पदभार संभाला था। वह 19 फरवरी 2025 को मुख्य निर्वाचन आयुक्त बने। ऐसे में ज्ञानेश कुमार को लेकर राहुल गांधी के आरोपों को उन्होंने बेतुका करार दिया।
‘जेल भेजने का अधिकार न्यायपालिका को, राजनीतिक मंच को नहीं’
राहुल गांधी की ओर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जेल भेजने संबंधी बयान पर भी डॉ. वर्मा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एक तरफ राहुल गांधी ‘मोहब्बत की दुकान’ की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को जेल भेजने की घोषणा करते हैं। किसी व्यक्ति को अपराधी घोषित करने और सजा देने का अधिकार न्यायपालिका के पास है, न कि रामलीला मैदान में जुटी भीड़ के पास।
उन्होंने न्यायपालिका, निर्वाचन आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जे के आरोपों को भी निराधार बताते हुए कहा कि इस तरह के बयान जनता को भ्रमित करने का प्रयास हैं।
कांग्रेस को आपातकाल की याद दिलाई
डॉ. वर्मा ने कांग्रेस के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का निर्वाचन निरस्त कर दिया था। इसके महज 13 दिन बाद देश में आपातकाल लागू कर दिया गया। इस दौरान विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियां हुईं, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और नागरिक अधिकारों का दमन किया गया।
उन्होंने कहा कि जिस कांग्रेस के शासनकाल में संविधान और नागरिक स्वतंत्रताओं पर आपातकाल के दौरान प्रहार हुआ, वही पार्टी आज लोकतंत्र की संरक्षक बनने का दावा कर रही है। संविधान किसी परिवार की जागीर नहीं है और राजनीतिक धमकियों के जरिए संवैधानिक संस्थाओं को दबाव में लाने की कोशिश बंद होनी चाहिए।
1 नवंबर को कार्यक्रम आयोजित करने पर भी उठाए सवाल
डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने 1 नवंबर की तारीख पर रामलीला मैदान में आयोजित कार्यक्रम को लेकर भी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे सिखों की भावनाओं के अपमान से जोड़ते हुए कहा कि दीपावली के अवसर पर रविवार को कार्यक्रम आयोजित करना व्यापारियों के प्रति कांग्रेस की विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर राहुल गांधी की टिप्पणियों को लेकर भी डॉ. वर्मा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को राजनीतिक बयानबाजी करते समय संवैधानिक मर्यादाओं का ध्यान रखना चाहिए।