
Ranchi: एक तरफ मुख्यमंत्री की मौजूदगी में पूजा-अर्चना, दूसरी तरफ उसी पूजा से जुड़े मामले में पांच आदिवासियों पर प्राथमिकी। और अब सवाल आठ बकरों के गायब होने का भी। गिरिडीह के मरांग बुरु स्थित दिशोम मांझीथान से जुड़ा यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पांच आदिवासी ग्रामीणों को पुलिसिया प्रताड़ना से राहत देने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
दरअसल, यह पूरा मामला 19 जुलाई 2024 का है। उस दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन के साथ मरांग बुरु स्थित दिशोम मांझीथान पहुंचे थे। यह कार्यक्रम गांडेय उपचुनाव में जीत और मुख्यमंत्री की जेल से रिहाई की मन्नत पूरी होने के बाद आयोजित किया गया था। बाबूलाल मरांडी के पत्र के मुताबिक, इस दौरान जिला प्रशासन के अधिकारी और पुलिस बल भी मौजूद थे। आदिवासी परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना की गई और नौ बकरे चढ़ाए गए। इनमें से एक बकरे की बलि नायके बाबा ने दी थी।
लेकिन पूजा के दौरान बलि से जुड़ी तस्वीरें वायरल होने के बाद मामला विवादों में आ गया। 24 जुलाई 2024 को मधुबन थाने में कांड संख्या 13/24 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। यह प्राथमिकी तत्कालीन प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी दिनेश्वर महतो के आवेदन पर दर्ज हुई थी। इसमें भारतीय न्याय संहिता की कई धाराएं लगाई गईं और सम्मेद शिखरजी क्षेत्र में मांस-मदिरा निषेध से जुड़े केंद्र सरकार के कार्यालय ज्ञापन का भी उल्लेख किया गया।
अब बाबूलाल मरांडी ने इसी प्राथमिकी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में उन्होंने बताया कि पीरटांड़ के पांच आदिवासी ग्रामीणों साहेबराम मुर्मू, फागु मरांडी, बुधन हेम्ब्रम, अर्जुन हेम्ब्रम और सिकन्दर हेम्ब्रम को इस मामले में लगातार परेशान किए जाने का आरोप है। इन ग्रामीणों की ओर से उन्हें संयुक्त अभ्यावेदन सौंपा गया है। मरांडी का दावा है कि पांच में से दो लोग कथित घटना के समय मौके पर मौजूद भी नहीं थे।
इस मामले में बाबूलाल मरांडी ने आठ बकरों के गायब होने का मुद्दा भी उठाया है। ग्रामीणों के हवाले से उन्होंने आरोप लगाया है कि पूजा के लिए लाए गए नौ बकरों में से एक की बलि दी गई, जबकि बाकी आठ बकरे पूजा स्थल से गायब हो गए। इसको लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी और उनके सहयोगियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। मरांडी ने इस आरोप की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
मुख्यमंत्री से बाबूलाल मरांडी ने तीन मांगें रखी हैं। पहली, पांचों ग्रामीणों को तत्काल राहत दी जाए और उनके खिलाफ कथित पुलिसिया प्रताड़ना पर रोक लगे। दूसरी, पूजा के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका और आठ बकरों के गायब होने के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो। तीसरी, मरांग बुरु में संथाल आदिवासी समाज की पारंपरिक पूजा पद्धति और जैन धर्म के पवित्र तीर्थ सम्मेद शिखरजी से जुड़े नियमों को लेकर सरकार अपनी नीति स्पष्ट करे।
बाबूलाल मरांडी का कहना है कि सरकार को ऐसा रास्ता निकालना चाहिए, जिससे आदिवासी समाज की धार्मिक परंपराओं और जैन समुदाय की आस्था, दोनों का सम्मान बना रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है।
अब इस पूरे प्रकरण में सवाल कई हैं। जिस पूजा में मुख्यमंत्री और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे, उसी से जुड़े मामले में पांच ग्रामीणों पर कार्रवाई क्यों हुई? आठ बकरों के गायब होने के आरोपों की जांच कब होगी? और मरांग बुरु की पारंपरिक पूजा को लेकर सरकार का स्पष्ट रुख क्या है? फिलहाल, बाबूलाल मरांडी की चिट्ठी के बाद इन सवालों पर हेमंत सरकार के जवाब का इंतजार है।
