
Bokaro: झारखंड में जंगल और गांव के बीच की दूरी जैसे-जैसे कम होती दिख रही है, वैसे-वैसे इंसानों के सामने वन्यजीवों का खतरा भी बढ़ रहा है। अब बोकारो के ग्रामीण इलाकों से सियारों के हमलों की ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जिन्होंने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हालात ये हैं कि खेतों में काम करने और गांव के रास्तों से गुजरने के दौरान भी लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं।
बोकारो में इस साल अब तक सियारों के हमले में तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 17 लोग घायल हुए हैं। नवंबर महीने में ही चार लोग इनके हमले में जख्मी हुए हैं। यानी खतरा किसी एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि कई इलाकों में लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं।
पेटरवार, कसमार और जरीडीह प्रखंड के चोड़ा, हिसिम, दुर्गापुर, खेतको, बेलडीह, चलकरी, चांपी, मायापुर और टांगटोना समेत कई गांवों में सियारों के हमले की घटनाएं हुई हैं। सुबह खेतों की ओर निकलना हो या शाम को घर लौटना, ग्रामीणों को अब हर कदम पर सतर्क रहना पड़ रहा है।
इन घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने ग्रामीणों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने सुबह, शाम और रात में अकेले बाहर नहीं निकलने, साथ में लाठी और टॉर्च रखने तथा बच्चों और बुजुर्गों को अकेला नहीं छोड़ने की सलाह दी है। मवेशियों को सुरक्षित रखने और सियार दिखने पर उससे दूरी बनाए रखने को भी कहा गया है।
सियार के काटने की स्थिति में रेबीज का खतरा हो सकता है। इसलिए घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोना और तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन और जरूरत पड़ने पर अन्य उपचार कराया जाना चाहिए।
वन विभाग के अनुसार, हमले में घायल होने या मौत की स्थिति में मुआवजे का भी प्रावधान है। इसके लिए संबंधित वन पदाधिकारी या वनरक्षी से संपर्क किया जा सकता है।
हाथियों के हमलों से पहले ही परेशान ग्रामीणों के सामने अब सियारों की चुनौती खड़ी हो गई है। बोकारो की ये घटनाएं बताती हैं कि वन्यजीवों से प्रभावित गांवों में लोगों की सुरक्षा के लिए सतर्कता के साथ-साथ ठोस निगरानी और समय पर कार्रवाई भी जरूरी है।