
मुंबई- मशहूर सेलिब्रिटी शेफ विकास खन्ना ने अमृतसर में मनाई गई अपनी बचपन की लोहड़ी की यादों को स्नेहपूर्वक साझा करते हुए कहा कि उनके बचपन में फसल उत्सव सिर्फ एक आयोजन नहीं थे, बल्कि एक ऐसा माहौल थे जिसने उनके खाने के प्रति रिश्ते को गहराई से गढ़ा।
जब उनसे पूछा गया कि क्या कोई फसल उत्सव से जुड़ी बचपन की याद आज भी उन्हें प्रेरित करती है, तो उन्होंने तुरंत जवाब दिया, “हां, बहुत गहराई से।”
आईएएनएस से बातचीत में विकास ने कहा, “अमृतसर में बड़े होते हुए फसल उत्सव किसी इवेंट की तरह नहीं होते थे — वे एक माहौल थे।”
इन यादों की अहमियत बताते हुए उन्होंने कहा कि लोहड़ी की शामें अलाव की गर्माहट, लोक गीतों की धुन और मां के हाथों बने त्योहारों के व्यंजनों से भरी होती थीं।
उन्होंने कहा, “मुझे आज भी लोहड़ी की शामें याद हैं — अलाव की गर्मी, लोक गीतों की आवाज़ और मेरी मां का पूरे समर्पण से खाना बनाना। रसोई में गुड़, मूंगफली, रेवड़ी और गजक की खुशबू फैली रहती थी, और वह सुगंध आज भी मेरे भीतर बसी हुई है।”
विकास ने आगे कहा कि खाने से भी बढ़कर जो बात उनके दिल में बस गई, वह थी हर भोजन से पहले महसूस की जाने वाली प्रार्थना की भावना।
“लेकिन जो याद मुझे सबसे ज्यादा प्रेरित करती है, वह यह है कि खाने से पहले हमेशा एक प्रार्थना का भाव होता था — जो ज़ोर से कही नहीं जाती थी, बल्कि भीतर से महसूस की जाती थी। क्योंकि हमारे घरों में फसल का मतलब था — भोजन को कभी हल्के में न लेना। आज भी मैं वही सीख अपने हर काम में लेकर चलता हूं, चाहे वह मास्टरशेफ इंडिया ही क्यों न हो, जहां भोजन हमेशा कहानी, संस्कृति और आत्मा से जुड़ा होता है।”
अपने पसंदीदा त्योहार व्यंजन के बारे में उन्होंने कहा, “मेरे लिए फसल के मौसम में पंजाब का खाना हमेशा खास रहेगा — सरसों का साग और मक्की की रोटी। यह सिर्फ एक व्यंजन नहीं, एक एहसास है।”
उन्होंने कहा कि इसमें खेतों की खुशबू, सर्दियों की धूप की गर्माहट और परिवार के साथ बैठने की आवाज़ें समाई होती हैं।
“घी के साथ साग का पहला कौर यह याद दिलाता है कि भारत की सबसे बड़ी ताकत हमेशा इसकी ज़मीन और इसके लोग रहे हैं। मुझे यह भी अच्छा लगता है कि पूरे भारत में फसल से जुड़े व्यंजन — तिल-गुड़, पोंगल, पिठा, पायसम — भले ही अलग दिखते हों, लेकिन भावना एक ही होती है: कृतज्ञता। यही हार्वेस्ट स्पेशल की आत्मा है — फसल की भाषा के ज़रिए भारत का उत्सव।”
भारत में फसल उत्सवों की जड़ें कृषि संस्कृति में गहराई से जुड़ी हैं। इस पर बात करते हुए विकास ने कहा कि ये उत्सव खानपान की परंपराओं और पाक दर्शन को प्रभावित करते हैं।
उन्होंने कहा, “फसल उत्सव हमें याद दिलाते हैं कि भोजन रसोई में नहीं, मिट्टी में जन्म लेता है।”
“भारत का खाना पकाने का दर्शन हमेशा मौसमी, सम्मानपूर्ण और कृतज्ञता से भरा रहा है। जब हम फसल का जश्न मनाते हैं, तो हम ज़मीन पर काम करने वाले हाथों, प्रकृति की लय और अनाज की पवित्रता का सम्मान करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “इसीलिए पोंगल, लोहड़ी, बैसाखी, मकर संक्रांति, बिहू और ओणम जैसे फसल उत्सव सिर्फ दावत नहीं होते, बल्कि शुद्धतम रूप में सामग्री का सम्मान होते हैं — नया चावल, गुड़, तिल, दालें, ताज़ा नारियल और गन्ना।”
विकास के अनुसार, फसल से जुड़ा भोजन हमें सबसे बड़ा सबक सिखाता है — “सादगी ही सबसे बड़ा वैभव है।”
उन्होंने यह भी माना कि फसल आधारित भोजन भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में भोजन की सबसे सच्ची कहानी कहता है।
“मैं सच में मानता हूं कि फसल का भोजन भोजन-कथाओं का सबसे ईमानदार रूप है — क्योंकि इसमें कोई दिखावा नहीं होता। यह ज़रूरत, प्रकृति और पोषण से जन्मा भोजन है। यह इस बात पर आधारित है कि ज़मीन क्या देती है और पीढ़ियों से मिली समझ के साथ हम उसे कैसे रूप देते हैं। यह ट्रेंड्स के बारे में नहीं, बल्कि सच्चाई के बारे में है।”
“वैश्विक स्तर पर भी महान व्यंजन फसलों पर ही आधारित हैं — चावल की संस्कृतियां, रोटी की संस्कृतियां, मक्का की संस्कृतियां। भले ही सामग्री अलग हो, भावना एक ही है — समृद्धि का उत्सव और अभाव का सम्मान।”
शेफ विकास खन्ना वर्तमान में ‘मास्टरशेफ इंडिया’ में नजर आ रहे हैं, जो सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन और सोनी लिव पर प्रसारित होता है।
With inputs from IANS