
नई दिल्ली: राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (NCH) ने होम्योपैथी और पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सकों को लेकर की जा रही भ्रामक एवं आधारहीन टिप्पणियों पर चिंता जताते हुए मीडिया संस्थानों, स्वास्थ्य संगठनों और आम नागरिकों से जिम्मेदारीपूर्ण तथा तथ्यपरक संवाद की अपील की है।
बुधवार को जारी एक परामर्श (एडवाइजरी) में आयोग ने कहा कि होम्योपैथी या पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सकों के संबंध में सार्वजनिक बयान देने से पहले तथ्यों की जांच और सटीकता सुनिश्चित करना आवश्यक है। यह अपील प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल मीडिया के साथ-साथ सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए भी की गई है।
राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के अध्यक्ष Dr. Tarkeshwar Jain ने कहा कि आयोग ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया है, जिनमें विभिन्न मंचों पर होम्योपैथी के खिलाफ मानहानिकारक और अपुष्ट दावे प्रसारित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी चिकित्सा पद्धति पर चर्चा तथ्यों और जिम्मेदारी के आधार पर होनी चाहिए।
डॉ. जैन ने स्पष्ट किया कि होम्योपैथी, National Commission for Homoeopathy Act, 2020 के तहत मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धति है। वहीं, होम्योपैथिक दवाओं का नियमन Drugs and Cosmetics Act, 1940 के प्रावधानों के अनुसार किया जाता है।
उन्होंने बताया कि होम्योपैथी शिक्षा आयोग द्वारा निर्धारित अकादमिक ढांचे के तहत संचालित होती है और स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश National Eligibility-cum-Entrance Test (NEET) में सफल अभ्यर्थियों के माध्यम से होता है।
आयोग के अनुसार, पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सक निर्धारित शिक्षा और प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ही कानून एवं नियामकीय प्रावधानों के अनुरूप चिकित्सा अभ्यास के लिए अधिकृत होते हैं।
एडवाइजरी में कहा गया है कि यदि किसी व्यक्तिगत चिकित्सक के आचरण या कार्यशैली को लेकर कोई शिकायत या आरोप है, तो उसे वैधानिक, नियामकीय, अनुशासनात्मक अथवा न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से उठाया जाना चाहिए। पूरे पेशे या चिकित्सा पद्धति के खिलाफ व्यापक और सामान्यीकृत आरोप लगाना उचित नहीं है।
आयोग ने दोहराया कि वह होम्योपैथी शिक्षा, पेशेवर आचरण और नैतिक मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है तथा पंजीकृत चिकित्सकों की गरिमा और कानूनी मान्यता की रक्षा करेगा।
डॉ. जैन ने चेतावनी दी कि होम्योपैथी और उसके चिकित्सकों के बारे में जानबूझकर भ्रामक, निराधार या मानहानिकारक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ आयोग आवश्यक होने पर कानूनी कार्रवाई भी कर सकता है।
राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग ने कहा कि यह परामर्श होम्योपैथी के क्षेत्र में मानकों को बनाए रखने और विषय पर जागरूक, संतुलित तथा जिम्मेदार सार्वजनिक विमर्श को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जारी किया गया है।
With inputs from IANS