हाइड्रोजन ट्रेन के लोको पायलट ने साझा किया अनुभव, बोले- उन्नत सुरक्षा और प्रदूषण मुक्त तकनीक इसकी सबसे बड़ी ताकतBy Admin Sat, 18 July 2026 02:04 PM

नई दिल्ली: भारत की पहली हाइड्रोजन संचालित यात्री ट्रेन के शुभारंभ के साथ देश ने स्वच्छ और हरित रेल परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। हरियाणा के जींद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ट्रेन को हरी झंडी दिखाए जाने के बाद इसके लोको पायलट चंद्रकांत कुमार ने इस अत्याधुनिक ट्रेन की विशेषताओं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपने अनुभव साझा किए।

चंद्रकांत कुमार ने कहा कि यह ट्रेन पारंपरिक डीजल और बिजली से चलने वाली ट्रेनों से पूरी तरह अलग है, क्योंकि इसका संचालन हाइड्रोजन ईंधन से होगा। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से कार्बन उत्सर्जन नहीं होता, जिससे पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता। उनके अनुसार, हाइड्रोजन पानी से प्राप्त की जाती है और उसी के माध्यम से ट्रेन का संचालन किया जाता है, जो इसे प्रदूषण मुक्त परिवहन का एक बेहतर विकल्प बनाती है।

उन्होंने बताया कि इस ट्रेन के संचालन की जिम्मेदारी संभालने से पहले लोको पायलटों को चेन्नई में चार दिनों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें हाइड्रोजन तकनीक और ट्रेन के संचालन से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारियां दी गईं।

सुरक्षा व्यवस्था पर प्रकाश डालते हुए कुमार ने कहा कि ट्रेन में अत्याधुनिक और पूरी तरह स्वचालित सुरक्षा प्रणाली लगाई गई है। धुआं, गैस रिसाव या आग जैसी किसी भी आपात स्थिति में यह प्रणाली स्वतः सक्रिय होकर अलग-अलग तरीके से प्रतिक्रिया देती है। उन्होंने कहा कि लोको पायलटों के लिए संचालन प्रणाली भी काफी आरामदायक बनाई गई है, जिससे ट्रेन चलाना सुरक्षित और सुविधाजनक होता है।

उन्होंने बताया कि ट्रेन की अधिकतम गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा है, लेकिन जींद-सोनीपत रेलखंड पर निर्धारित गति सीमा 75 किलोमीटर प्रति घंटा होने के कारण फिलहाल इसका संचालन इसी रफ्तार से किया जाएगा।

यह हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच पायलट परियोजना के रूप में चलाई जाएगी। इसके लिए जींद में स्वदेशी हाइड्रोजन भंडारण और ईंधन भरने की सुविधा विकसित की गई है। संपीड़ित हाइड्रोजन गैस के भंडारण और आपूर्ति के लिए पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पेसो) से आवश्यक अनुमति भी प्राप्त हो चुकी है।

इस परियोजना के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जो हाइड्रोजन आधारित रेल तकनीक पर काम कर रहे हैं। जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे देशों में भी इस तकनीक का परीक्षण या सीमित स्तर पर संचालन किया जा रहा है। भारतीय रेल का यह प्रयास ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण और देश के नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

 

With inputs from IANS