कृषि के लिए एआई का बड़ा बढ़ावा: 7.63 करोड़ किसान आईडी बनीं, 23.5 करोड़ फसल प्लॉट का सर्वेक्षणBy Admin Sat, 14 February 2026 11:49 AM

नई दिल्ली – भारत ने डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत कृषि क्षेत्र के लिए बड़े स्तर पर डिजिटल आधार तैयार किया है। आधिकारिक बयान के अनुसार, अब तक 7.63 करोड़ से अधिक किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं और 23.5 करोड़ फसल प्लॉट का सर्वेक्षण किया जा चुका है।

सरकार के अनुसार, नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम 66 फसलों और 432 से अधिक कीट प्रजातियों की निगरानी करता है। यह सिस्टम 10,000 से अधिक कृषि विस्तार कर्मियों को रियल-टाइम सलाह प्रदान करता है, जिससे कीटों की जल्द पहचान संभव हो पाती है।

सरकार ने बताया कि दिसंबर 2025 तक किसान ई-मित्र चैटबॉट ने 93 लाख से अधिक सवालों के जवाब दिए हैं और प्रतिदिन 11 क्षेत्रीय भाषाओं में 8,000 से ज्यादा किसानों के प्रश्नों का समाधान कर रहा है।

खरीफ 2025 के लिए स्थानीय मानसून आगमन के पूर्वानुमान का एआई आधारित पायलट प्रोजेक्ट 13 राज्यों के 3.88 करोड़ किसानों तक एसएमएस के माध्यम से पहुंचाया गया। सर्वेक्षण में शामिल 31 से 52 प्रतिशत किसानों ने इस पूर्वानुमान के आधार पर बुवाई और भूमि तैयारी से जुड़े फैसलों में बदलाव किया।

इसके अलावा YES-TECH, CROPIC और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का व्हाट्सएप चैटबॉट एआई आधारित तकनीक का उपयोग कर फसल बीमा प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी बना रहे हैं।

गौरतलब है कि केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR) नामक बहुभाषी एआई टूल प्रस्तावित किया गया है, जो एग्रीस्टैक पोर्टल और आईसीएआर पैकेज को एआई सिस्टम के साथ एकीकृत करेगा।

बयान में कहा गया कि इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 भारत के समावेशी विकास के लिए एआई को एक प्रभावी साधन के रूप में प्रस्तुत करता है।

एग्रीस्टैक डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन का मुख्य हिस्सा है, जो किसानों को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान (किसान आईडी) प्रदान करता है। यह पहचान भूमि रिकॉर्ड, पशुधन स्वामित्व, उगाई गई फसल और सरकारी योजनाओं के लाभ से जुड़ी होती है, जिससे किसानों को सुरक्षित पहचान और कृषि सेवाओं तक आसान पहुंच मिलती है।

किसान आईडी बनाने और सत्यापन प्रक्रिया को तेज करने के लिए पीएम-किसान योजना के प्रशासनिक फंड से प्रति किसान आईडी 10 रुपये निर्धारित किए गए हैं। एग्रीस्टैक मोबाइल आधारित डिजिटल फसल सर्वेक्षण भी उपलब्ध कराता है, जिससे फसल के प्रकार और खेती क्षेत्र से जुड़ा रियल-टाइम डेटा प्राप्त होता है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को प्राकृतिक आपदाओं जैसी अनिश्चित परिस्थितियों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए शुरू की गई थी। इस योजना के तहत किसान खरीफ खाद्यान्न और तिलहन फसलों के लिए 2 प्रतिशत, रबी खाद्यान्न और तिलहन फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत तथा वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए 5 प्रतिशत प्रीमियम का भुगतान करते हैं, जबकि बाकी राशि सरकार द्वारा सब्सिडी के रूप में दी जाती है।

 

With inputs from IANS