
म्यूनिख। संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा भारत की रूसी तेल खरीद को लेकर बार-बार किए जा रहे दावों के बीच भारत ने अपनी “रणनीतिक स्वायत्तता” दोहराते हुए स्पष्ट किया है कि ऊर्जा संबंधी निर्णय उपलब्धता, लागत और जोखिम के आधार पर ही लिए जाएंगे।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने रूस के तेल क्षेत्र पर नए प्रतिबंध लगाए हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प तथा विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दावा किया है कि भारत ने रूसी कच्चे तेल के अतिरिक्त आयात को रोकने पर सहमति जताई है।
शनिवार को Munich Security Conference को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस धारणा को खारिज कर दिया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता को कमजोर करेगा।
जयशंकर की टिप्पणी उस बयान के बाद आई, जिसमें रुबियो ने कहा था कि वाशिंगटन को नई दिल्ली से यह आश्वासन मिला है कि वह रूस के ऊर्जा निर्यात पर लगाए गए नए अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद अतिरिक्त रूसी तेल नहीं खरीदेगा। यह बयान रूसी समाचार एजेंसी TASS द्वारा उद्धृत किया गया था।
इससे पहले ट्रम्प ने व्यापार तनाव के महीनों बाद कथित सफलता का ऐलान करते हुए कहा था कि भारत रूसी तेल खरीद बंद कर अमेरिका से अधिक तेल खरीदेगा।
हालांकि जयशंकर ने स्पष्ट कर दिया कि भारत की विदेश नीति स्वतंत्र निर्णय लेने के सिद्धांत पर आधारित रहेगी। उन्होंने कहा कि रणनीतिक स्वायत्तता भारत के इतिहास और विकास का अहम हिस्सा है और यह राजनीतिक मतभेदों से परे एक स्थायी नीति है।
ऊर्जा खरीद पर उन्होंने वैश्विक तेल बाजार को जटिल बताते हुए कहा कि भारत की तेल कंपनियां अन्य देशों की तरह उपलब्धता, कीमत और जोखिम जैसे कारकों का मूल्यांकन करके ही फैसले लेती हैं।
जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या भारत व्यापार समझौते के तहत रूसी तेल खरीद बंद करेगा, तो उन्होंने साफ कहा कि भारत स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का अधिकार रखता है, भले ही वह अन्य देशों की सोच से अलग क्यों न हो।
भारत ने अभी तक औपचारिक रूप से यह न तो पुष्टि की है और न ही खंडन किया है कि उसने अमेरिकी दावों के अनुसार रूसी तेल के अतिरिक्त आयात को रोकने की प्रतिबद्धता जताई है।
With inputs from IANS