India AI Impact Summit 2026 ग्लोबल साउथ के लिए गर्व का क्षण: Narendra ModiBy Admin Thu, 19 February 2026 11:57 AM

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत में एआई इम्पैक्ट समिट का आयोजन ग्लोबल साउथ के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने तेजी से बदलते तकनीकी युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

समिट को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने वैश्विक नेताओं और गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया और इस आयोजन को पैमाने और महत्व की दृष्टि से अभूतपूर्व बताया।

उन्होंने कहा, “मैं आप सभी का दुनिया के सबसे बड़े और ऐतिहासिक एआई समिट में स्वागत करता हूं। भारत, जहां यह समिट आयोजित हो रहा है, दुनिया की एक-छठी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। यह एक युवा देश है, दुनिया के सबसे बड़े टेक टैलेंट पूल और टेक इकोसिस्टम का केंद्र है। भारत नई तकनीक बनाता भी है और उसे अपनाता भी है।”

उन्होंने जोड़ा, “यह ग्लोबल साउथ के लिए गर्व की बात है कि एआई समिट का आयोजन भारत में हो रहा है।”

अपने संबोधन के दौरान एआई-सक्षम सांकेतिक भाषा व्याख्या (साइन लैंग्वेज इंटरप्रिटेशन) भी प्रदर्शित की गई, जो समिट में चर्चा की जा रही तकनीक के व्यावहारिक उपयोग को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री ने एआई की परिवर्तनकारी क्षमता पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि तकनीकी क्रांतियां अक्सर ऐसे रूप में शुरू होती हैं, जिन्हें शुरुआत में पूरी तरह समझ पाना कठिन होता है।

उन्होंने कहा, “जब पहली बार वायरलेस सिग्नल प्रसारित हुए थे, तब किसी ने कल्पना नहीं की थी कि एक दिन दुनिया रियल टाइम में जुड़ जाएगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानव इतिहास का ऐसा ही परिवर्तन है। आज हम जो देख और अनुमान लगा रहे हैं, वह इसके प्रभाव की केवल शुरुआत है। एआई मशीनों को बुद्धिमान बना रहा है, लेकिन उससे भी अधिक यह मानव क्षमता को कई गुना बढ़ा रहा है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में तकनीकी परिवर्तन की गति असाधारण रूप से तेज हुई है। पहले किसी नई तकनीक के पूर्ण प्रभाव को देखने में दशकों लग जाते थे, लेकिन आज “मशीन लर्निंग से लर्निंग मशीन” तक की यात्रा अधिक तेज, गहरी और व्यापक हो गई है।

युवाओं के उत्साह का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक युवा केवल एआई को अपना नहीं रहे, बल्कि उसके भविष्य को आकार भी दे रहे हैं।

उन्होंने कहा, “जिस गति से दुनिया के युवा एआई को अपनाकर उसका स्वामित्व ले रहे हैं, वह अनुकरणीय है। विशेष रूप से इस एआई समिट में आए युवाओं में जबरदस्त उत्साह दिखाई देता है।”

तकनीकी प्रगति के साथ जिम्मेदारी की आवश्यकता पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया को केवल तात्कालिक लाभ से आगे सोचने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, “हमें वर्तमान पीढ़ी के साथ-साथ यह भी सोचना होगा कि आने वाली पीढ़ियों को हम किस स्वरूप का एआई सौंपेंगे। असली सवाल यह नहीं है कि भविष्य में एआई क्या कर सकता है, बल्कि यह है कि वर्तमान में हम एआई के साथ क्या कर रहे हैं।”

परमाणु ऊर्जा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “ऐसे प्रश्न मानवता के सामने पहले भी आए हैं। परमाणु शक्ति इसका सबसे सशक्त उदाहरण है। हमने उसका विनाश भी देखा है और उसका सकारात्मक योगदान भी देखा है।”

एआई को एक परिवर्तनकारी शक्ति बताते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसका उपयोग दिशाहीन होगा तो यह विनाश का कारण बन सकता है, लेकिन सही दिशा में उपयोग होने पर यह समाधान का माध्यम बन सकता है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग की आवश्यकता को दोहराया।

 

With inputs from IANS