
नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में राजनीतिक टकराव तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने लोकसभा सांसदों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी करते हुए 9 और 10 मार्च को सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। पार्टी ने अपने सभी सांसदों से इन दोनों दिनों में सदन में मौजूद रहकर सरकार के पक्ष में मतदान करने और महत्वपूर्ण विधायी कार्यों में भाग लेने को कहा है।
भाजपा के मुख्य सचेतक संजय जायसवाल द्वारा जारी व्हिप में कहा गया है कि 9 और 10 मार्च को लोकसभा में बेहद महत्वपूर्ण विधायी कार्य होने वाले हैं। ऐसे में पार्टी ने सभी सांसदों से दोनों दिन सदन में उपस्थित रहने और पार्टी की आधिकारिक लाइन का समर्थन करने का निर्देश दिया है।
भाजपा का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब विपक्ष लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्ष के साथ पक्षपातपूर्ण व्यवहार किया है और कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने की अनुमति नहीं दी।
सूत्रों के मुताबिक विपक्ष द्वारा लाया गया प्रस्ताव 9 मार्च को ही सदन में चर्चा के लिए लिया जा सकता है। हालांकि, यदि यह प्रस्ताव सदन में आता है तो ओम बिरला उस दौरान कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं करेंगे। उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि अपने खिलाफ प्रस्ताव आने की स्थिति में वे स्वयं को अध्यक्षता से अलग रखेंगे।
संसदीय नियमों के अनुसार, स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान के समय स्पीकर सदन में उपस्थित रह सकते हैं और उन्हें मतदान करने का अधिकार भी होता है।
जानकारी के अनुसार बजट सत्र के पहले चरण के दौरान विपक्ष के 100 से अधिक सांसदों ने स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस दिया था। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि स्पीकर ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान बोलने का मौका नहीं दिया।
विपक्ष का यह भी कहना है कि गलवान घाटी में चीनी सैनिकों की गतिविधियों से जुड़े मुद्दों को उठाने की अनुमति भी नहीं दी गई। इन मुद्दों को लेकर विरोध करने पर आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित भी कर दिया गया था।
इस बीच कांग्रेस ने भी अपने लोकसभा सांसदों के लिए 9 से 11 मार्च तक अनिवार्य उपस्थिति का व्हिप जारी किया है। ऐसे में बजट सत्र के दूसरे चरण में संसद के भीतर तीखी बहस और सत्तापक्ष-विपक्ष के बीच जोरदार टकराव देखने को मिल सकता है।