
बिहार के राजनीति में लालू और तेजस्वी को एक और बड़ा झटका लगा। राज्यसभा चुनाव में राजद उम्मीदवार अमरेंद्रधारी सिंह हार गए। लालू और तेजस्वी की रणनीति फेल हो गई। महागठबंधन के विधायकों ने ही धोखा दे दिया। आरजेडी उम्मीदवार अमरेंद्रधारी सिंह अरबपति हैं। उम्मीद थी कि धनबल के सहारे वह फिर से चुनाव जीत जाएंगे। लेकिन एनडीए की रणनीति के सामने राजद और एडी सिंह की रणनीति फेल हो गई। एनडीए ने महागठबंधन में फुट की कहानी लिख दी। कांग्रेस के तीन और राजद का एक विधायक मतदान करने नहीं पहुंचा। भाजपा के मैनेजमेंट के सामने तेजस्वी असहाय दिखे। कांग्रेस तो छोड़िए आरजेडी के विधायक को भी साथ नहीं रख पाए।
एनडीए ने खेल कर दिया और लालू की योजना फेल हो गई। धनबल के सहारे फिर से राज्यसभा जाने की एडी सिंह की मंशा सफल नहीं हुई। लगता है मालपानी के खेल में वह पीछे रह गए और विरोधी आगे निकल गए। एनडीए के पांचों उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहे। राष्ट्रीय जनता दल ने ओवैसी की पार्टी के पांच विधायकों और बसपा के एक विधायक को अपने पाले में करने में सफल रहने की बात कही जा रही है। लेकिन अपने ही लोगों ने धोखा दे दिया। बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद राजद की दूसरी बड़ी हार है।
तेजस्वी यादव खुद राज्यसभा का चुनाव लड़कर दिल्ली की राजनीति करना चाह रहे थे। लेकिन अंतिम दोनों में उन्होंने अपनी योजना बदल ली। उन्हें पता था कि संख्या बल नहीं है ऐसे में यदि वह चुनाव में जाएंगे और हार होगी तो मिट्टी पलीद हो जाएगी। इसलिए राजद ने धनपति एडी सिंह को फिर से उम्मीदवार बनाया था। लेकिन यह योजना भी फेल हो गई। अपनों ने ही खेल बिगाड़ दिया।