चुनावी हार के बाद CPI(M) में बढ़ी अंदरूनी बगावत, पिनराई विजयन पर उठने लगे सवालBy Admin Sat, 16 May 2026 01:48 PM

तिरुवनंतपुरम। Pinarayi Vijayan लंबे समय तक केरल में Communist Party of India (Marxist) के सबसे मजबूत और प्रभावशाली नेता माने जाते रहे। लेकिन हालिया विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद अब पार्टी के भीतर ही उनके नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं।

1996 में E. K. Nayanar की कैबिनेट में शामिल होने और 1998 में पार्टी के राज्य सचिव बनने के बाद विजयन ने धीरे-धीरे संगठन पर मजबूत पकड़ बना ली थी। वर्षों तक पार्टी में शायद ही कोई खुलकर उनके खिलाफ बोलने की हिम्मत करता था।

लेकिन 4 मई को आए विधानसभा चुनाव परिणामों ने पूरी तस्वीर बदल दी। कभी 140 सदस्यीय विधानसभा में 99 सीटों पर काबिज वाम मोर्चा अब सिमटकर सिर्फ 35 सीटों तक पहुंच गया। इस हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष तेजी से बढ़ा है।

बताया जा रहा है कि पार्टी की पोलित ब्यूरो बैठक से शुरू हुई नाराजगी अब राज्य समिति और जिला स्तर तक पहुंच गई है। M. V. Govindan, जो पार्टी के राज्य सचिव हैं, वे भी आलोचनाओं के घेरे में आ गए हैं।

पथनमथिट्टा जिला सचिवालय की बैठक में विजयन को विपक्ष का नेता बनाए जाने के फैसले पर सवाल उठाए गए। नेताओं का कहना था कि उम्र सीमा में दी गई छूट मुख्यमंत्री पद के लिए थी, न कि इतनी बड़ी चुनावी हार के बाद भी नेतृत्व जारी रखने के लिए।

बैठक में मुख्यमंत्री कार्यालय की कार्यशैली की भी आलोचना हुई। आरोप लगाया गया कि वाम सरकार के दस साल के शासन के दौरान जमीनी कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया गया और उन्हें नेतृत्व तक पहुंच नहीं दी गई।

दिलचस्प बात यह है कि Kannur, जिसे विजयन का राजनीतिक गढ़ माना जाता है, वहां से भी असंतोष की आवाजें उठी हैं। नेताओं ने माना कि पार्टी जनता का मूड समझने में विफल रही और चुनाव प्रचार के दौरान विजयन की शैली और बयान पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हुए।

वहीं एम.वी. गोविंदन पर भी संगठन से ज्यादा निजी और पारिवारिक हितों को प्राथमिकता देने के आरोप लग रहे हैं। उनकी स्थिति तब और कमजोर हो गई जब उनकी पत्नी चुनाव में पार्टी के बागी उम्मीदवार से हार गईं।

अभी 12 और जिला समिति बैठकों का आयोजन बाकी है, इसलिए पार्टी के भीतर विरोध और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या CPI(M) नेतृत्व इस संकट पर गंभीर मंथन के लिए विशेष अधिवेशन बुलाएगा।

गौरतलब है कि 2024 लोकसभा चुनाव और स्थानीय निकाय चुनावों में खराब प्रदर्शन के बाद भी पार्टी नेतृत्व ने समीक्षा का भरोसा दिया था। लेकिन इस बार मामला सिर्फ चुनावी हार तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि पार्टी नेतृत्व की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

कई वर्षों में पहली बार ऐसा लग रहा है कि पिनराई विजयन और एम.वी. गोविंदन दोनों ही अपनी ही पार्टी के भीतर राजनीतिक रूप से कमजोर पड़ते दिखाई दे रहे हैं।

 

With inputs from IANS