
Ladakh : भारतीय सेना का एक चीता हेलीकॉप्टर लद्दाख के तांग्तसे पहाड़ी क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में हेलीकॉप्टर में सवार तीनों लोग चमत्कारिक रूप से सुरक्षित बच गए, हालांकि उन्हें हल्की चोटें आई हैं।
अधिकारियों के अनुसार यह घटना बुधवार को हुई थी, लेकिन इसकी जानकारी शुक्रवार को सामने आई। यह एक सिंगल-इंजन HAL चीता हेलीकॉप्टर था, जिसे लेफ्टिनेंट कर्नल और मेजर चला रहे थे, जबकि Major General Sachin Mehta इसमें यात्री के रूप में सवार थे।
हेलीकॉप्टर ने उच्च हिमालयी क्षेत्र में उड़ान के दौरान नियंत्रण खो दिया और तांग्तसे इलाके में गिर गया। दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है और एक औपचारिक कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी भी गठित की गई है।
अधिकारियों ने बताया कि जिस इलाके में हादसा हुआ वह बेहद दुर्गम और ऊंचाई वाला है, जहां ऑपरेशन करना पहले से ही चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे कठिन हालात में सभी यात्रियों का सुरक्षित बचना राहत की बात मानी जा रही है।
चीता हेलीकॉप्टर फ्रांसीसी अलौएट-III का लाइसेंस प्राप्त संस्करण है और भारतीय सेना के लिए लंबे समय से खासकर Siachen Glacier जैसे क्षेत्रों में बेहद महत्वपूर्ण रहा है।
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में इस बेड़े की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। पिछले एक दशक में चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों से जुड़े 15 से अधिक हादसे दर्ज किए गए हैं, जिनमें कई पायलटों की जान भी गई है।
इन्हीं सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए सेना अब अपने हेलीकॉप्टर बेड़े के आधुनिकीकरण की योजना पर काम कर रही है। आने वाले 1–2 वर्षों में पुराने चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों को चरणबद्ध तरीके से हटाने और उनकी जगह नए लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (LUH) लाने की योजना है।
इन नए हेलीकॉप्टरों की खरीद में देश में विकसित मॉडल और अल्पकालिक लीज दोनों शामिल हैं। Hindustan Aeronautics Limited इस परियोजना में अहम भूमिका निभा रही है।
सेना का लक्ष्य लगभग 250 नए LUH हेलीकॉप्टर शामिल करने का है, जो अधिक गति, बेहतर ऊंचाई क्षमता और लंबी रेंज के साथ आधुनिक परिचालन जरूरतों को पूरा कर सकेंगे।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि मौजूदा चीता बेड़ा अभी भी सीमित रूप से सेवा योग्य है, लेकिन हालिया दुर्घटना ने इसकी जगह नए और सुरक्षित प्लेटफॉर्म की आवश्यकता को फिर से उजागर किया है।
With inputs from IANS