रक्षा बलों को मिली अधिक वित्तीय शक्तियां, 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की खरीद प्रक्रियाओं में आएगी तेजीBy Admin Thu, 04 June 2026 03:29 PM

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने रक्षा खरीद प्रक्रियाओं को तेज और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सशस्त्र बलों को दी गई वित्तीय शक्तियों में बड़ा विस्तार किया है। नई व्यवस्था के तहत सेना, नौसेना और वायुसेना के अधिकारियों को अधिक वित्तीय अधिकार दिए गए हैं, जिससे रक्षा परियोजनाओं और खरीद अनुबंधों को तेजी से मंजूरी मिल सकेगी।

रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने गुरुवार को नई दिल्ली में रक्षा सेवाओं के लिए संशोधित वित्तीय शक्तियों (Delegation of Financial Powers for the Defence Services) की घोषणा की।

सरकार के अनुसार, संशोधित ढांचे के तहत वित्तीय शक्तियों में कई मामलों में 100 प्रतिशत तक और कुछ मामलों में उससे भी अधिक वृद्धि की गई है। इससे फील्ड कमांडरों को त्वरित निर्णय लेने और आवश्यक खरीद प्रक्रियाओं को शीघ्र पूरा करने में मदद मिलेगी।

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस कदम से रक्षा अनुबंधों के निष्पादन और विभिन्न परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी, साथ ही जमीनी स्तर पर तैनात कमांडरों की परिचालन क्षमता भी मजबूत होगी।

नई व्यवस्था का एक प्रमुख पहलू स्वदेशीकरण और अनुसंधान एवं विकास (R&D) से जुड़ी वित्तीय शक्तियों का विस्तार है। इन अधिकारों को दोगुना किया गया है ताकि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिले और विदेशी उपकरण निर्माताओं पर निर्भरता कम हो।

इसके अलावा, आपातकालीन परिचालन आवश्यकताओं (Urgent Operational Requirements) के लिए निर्धारित वित्तीय सीमा में भी 100 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। सेना, वायुसेना और नौसेना के कमांडरों को विशेष वित्तीय शक्तियों में भी विस्तार दिया गया है।

संशोधित नियमों में संयुक्त सेवा खरीद (Joint Service Procurement) को प्रोत्साहित करने के लिए नए प्रावधान जोड़े गए हैं। इसके तहत प्रमुख सेवा शाखा पहले की तुलना में अधिक अधिकारों के साथ खरीद प्रक्रिया का संचालन कर सकेगी, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग और समन्वय सुनिश्चित होगा।

सरकार ने वस्तुओं और सेवाओं की खरीद को अधिक विकेंद्रीकृत और सरल बनाने के लिए कई नए सक्षम वित्तीय प्राधिकरण (Competent Financial Authorities) भी स्थापित किए हैं।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वित्तीय शक्तियों से संबंधित नियमों को आखिरी बार वर्ष 2021 में अधिसूचित किया गया था। रक्षा बलों के बढ़ते आकार, परिचालन आवश्यकताओं और रक्षा बजट में वृद्धि को देखते हुए इस संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई।

सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था के तहत राजस्व मद के माध्यम से 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की रक्षा खरीद प्रक्रियाओं को तेजी से मंजूरी मिलने में मदद मिलेगी, जिससे सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारी और क्षमता में और सुधार होगा।

 

With inputs from IANS