‘बिना मेल बियाह, कनपट्टी ले सेनुर...’ लालू यादव का वो भाषण जो आज भी है चर्चितBy Admin Thu, 11 June 2026 12:26 PM

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के संस्थापक और बिहार की राजनीति के सबसे चर्चित नेताओं में से एक लालू प्रसाद यादव आज अपना 79वां जन्मदिन मना रहे हैं। 11 जून 1948 को बिहार के गोपालगंज जिले में जन्मे लालू यादव अपनी राजनीति के साथ-साथ अनोखी शैली, हाजिरजवाबी और चुटीले भाषणों के लिए भी जाने जाते हैं। उनके कई ऐसे किस्से हैं, जो आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं।

जब संसद में खुलकर जताई थी प्रधानमंत्री बनने की इच्छा

यह किस्सा साल 2008 का है, जब केंद्र में यूपीए सरकार सत्ता में थी और लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री के पद पर थे। 22 जुलाई 2008 को लोकसभा में चर्चा के दौरान लालू यादव ने अपने खास अंदाज में प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जाहिर की थी।

भाषण के दौरान उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री बनने की इच्छा किसे नहीं होती। हर नेता का सपना होता है कि वह देश का प्रधानमंत्री बने। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि उनका भी मन प्रधानमंत्री बनने का करता है, लेकिन उन्हें कोई जल्दबाजी नहीं है।

लालू यादव ने अपने भोजपुरिया अंदाज में कहा था, "बिना मेल बियाह, कनपट्टी ले सेनुर से कोई पीएम नहीं बनता।" उनके इस बयान पर सदन में मौजूद सांसदों के बीच ठहाके गूंज उठे थे। उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की थी कि प्रधानमंत्री बनने के लिए सही राजनीतिक परिस्थितियां और समर्थन जरूरी होता है।

दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज का भी उठाया मुद्दा

अपने भाषण में लालू यादव ने सामाजिक न्याय की राजनीति को भी प्रमुखता दी थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि देश में अभिजात्य वर्ग के वर्चस्व के बीच कोई दलित, पिछड़ा या अल्पसंख्यक वर्ग का व्यक्ति प्रधानमंत्री कैसे बन सकता है। उनका यह बयान उस समय राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा का विषय बना था।

जॉर्ज फर्नांडिस पर भी ली थी चुटकी

लालू यादव अपने भाषणों में राजनीतिक तंज और हास्य का बेहतरीन मिश्रण पेश करने के लिए जाने जाते हैं। रेल मंत्री रहते हुए उन्होंने संसद में पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस पर भी मजेदार टिप्पणी की थी।

उन्होंने कहा था कि जॉर्ज फर्नांडिस ने उन्हें समाजवाद का पाठ पढ़ाया था, लेकिन आज वह अलग राजनीतिक खेमे में बैठे हैं। इसके बाद उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए विकास और बुनियादी ढांचे के महत्व पर जोर दिया।

‘रोटी इंकलाब से नहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर से आएगी’

संसद में दिए गए अपने भाषण के दौरान लालू यादव ने कहा था कि केवल नारे लगाने या भाषण देने से लोगों को रोटी नहीं मिलेगी। उन्होंने अपने अंदाज में कहा था, "रोटी इंकलाब जिंदाबाद से नहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर से आएगी।"

उन्होंने विकास परियोजनाओं में आने वाली बाधाओं पर भी टिप्पणी की और कहा कि जब भी इंफ्रास्ट्रक्चर की बात होती है, तो कई तरह के विरोध सामने आ जाते हैं। अपने ग्रामीण और सहज अंदाज में दिए गए इन उदाहरणों ने उनके भाषण को और भी यादगार बना दिया।

आज भी वायरल होते हैं लालू के पुराने भाषण

लालू प्रसाद यादव की राजनीति जितनी चर्चित रही, उतने ही लोकप्रिय उनके भाषण भी रहे हैं। संसद से लेकर चुनावी मंच तक, उनकी भाषा और शैली आम लोगों से सीधे जुड़ती रही है। यही वजह है कि उनके कई पुराने भाषण आज भी सोशल Media पर वायरल होते रहते हैं। बिहार की राजनीति में लालू यादव एक ऐसे नेता रहे हैं, जिन्होंने अपने अनोखे अंदाज और हाजिरजवाबी से अलग पहचान बनाई। उनके जन्मदिन के मौके पर उनके राजनीतिक जीवन से जुड़े ये किस्से एक बार फिर लोगों को मुस्कुराने पर मजबूर कर रहे हैं।