'आत्मनिर्भर भारत ही शक्तिशाली भारत की पहचान', तीन स्वदेशी युद्धपोतों के कमीशनिंग पर बोले पीएम मोदीBy Admin Sun, 21 June 2026 01:47 PM







कोलकाता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भारतीय नौसेना में तीन अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोतों के शामिल होने के अवसर पर कहा कि कोई भी देश तभी शांति की बात कर सकता है, जब उसके पास अपनी सुरक्षा करने की पर्याप्त क्षमता हो। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र तभी वास्तविक अर्थों में शक्तिशाली बनता है, जब वह आत्मनिर्भर (Atmanirbhar) हो।

कोलकाता में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री ने आईएनएस दुनागिरी, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय को भारतीय नौसेना को समर्पित किया। इन तीनों युद्धपोतों का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने किया है और इन्हें 30 मार्च को नौसेना को सौंपा गया था।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि समुद्री शक्ति किसी भी देश की आर्थिक प्रगति और विकास की मजबूत नींव होती है। समुद्र न केवल वैश्विक व्यापार का प्रमुख माध्यम हैं, बल्कि समुद्र के भीतर बिछी सैटेलाइट केबलें वैश्विक संचार व्यवस्था की रीढ़ हैं। इसके अलावा, महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों का बड़ा भंडार भी समुद्र में मौजूद है। ऐसे में भारत अपनी समुद्री ताकत को लगातार मजबूत कर रहा है।

उन्होंने कहा कि स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत के नौसेना में शामिल होने के साथ ही भारत ने दुनिया को अपनी क्षमता का परिचय दे दिया था। अब ये तीनों युद्धपोत इस बात का प्रमाण हैं कि देश जहाज निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि आईएनएस दुनागिरी में लगभग 75 प्रतिशत, जबकि आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। उन्होंने कहा कि इन युद्धपोतों का डिजाइन, निर्माण, उपकरण और संसाधन सभी भारतीय हैं, जो देश की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता को दर्शाते हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का खरीदार नहीं, बल्कि निर्माता बनना चाहता है। जहाज निर्माण उद्योग से इस्पात, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्पेयर पार्ट्स जैसे कई अन्य उद्योग जुड़े हैं। इन तीनों युद्धपोतों के निर्माण में 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) ने योगदान दिया है, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं।

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प्रधानमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने देश में जहाज निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 70,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। साथ ही बंदरगाहों के आधुनिकीकरण और मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के विकास पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।

रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 तक भारत दुनिया में रक्षा उपकरणों का सबसे बड़ा खरीदार था, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। भारत न केवल अपनी जरूरत के रक्षा उपकरण बना रहा है, बल्कि उनका निर्यात भी कर रहा है। उन्होंने बताया कि 2014 में रक्षा निर्यात लगभग 700 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 40,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है और भारत आज 80 से अधिक देशों को रक्षा उत्पाद निर्यात कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि केवल शुरुआत है और भारत को अभी रक्षा एवं जहाज निर्माण के क्षेत्र में काफी आगे जाना है।

इस अवसर पर उन्होंने पश्चिम बंगाल की जहाज निर्माण परंपरा और यहां उपलब्ध कुशल मानव संसाधन की भी सराहना की। समारोह में नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल, राज्य सरकार के प्रतिनिधियों और जीआरएसई के अधिकारियों सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

 

 

With inputs from IANS

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