जम्मू-कश्मीर में स्कूली किताब पर विवाद, अलगाववादी नेताओं का महिमामंडन करने के आरोपों से घिरी उमर सरकारBy Admin Sat, 04 July 2026 04:32 PM

Srinagar। Omar Abdullah के नेतृत्व वाली जम्मू-कश्मीर सरकार एक स्कूली पुस्तक को लेकर विवादों में घिर गई है। आरोप है कि समग्र शिक्षा योजना के तहत खरीदी गई एक पुस्तक में अलगाववादी नेताओं और आतंकवाद से जुड़े व्यक्तियों का महिमामंडन किया गया है।

Jammu and Kashmir Peoples' Forum (जेकेपीएफ) ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि समग्र शिक्षा योजना के तहत स्कूलों में उपलब्ध कराई गई पुस्तक में Maqbool Bhat जैसे अलगाववादी नेता और Jammu Kashmir Liberation Front के संस्थापक को महिमामंडित किया गया है।

आलोचकों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि स्कूल पुस्तकालयों में ऐसी सामग्री पहुंचाई गई है, जो उग्रवाद को आकर्षक रूप में प्रस्तुत करती है। उन्होंने पुस्तक की सिफारिश करने वाले विशेषज्ञों और समग्र शिक्षा योजना से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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विरोध करने वालों ने यह भी मांग की है कि इस पुस्तक के वितरण के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ केंद्र शासित प्रदेश की सरकार आपराधिक मामला दर्ज करे।

आलोचकों का कहना है कि यह मामला निर्वाचित जम्मू-कश्मीर सरकार की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब इससे पहले उपराज्यपाल Manoj Sinha द्वारा 25 पुस्तकों पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर भी सरकार और उपराज्यपाल प्रशासन के बीच मतभेद सामने आए थे। उन पुस्तकों पर भी आतंकवाद का महिमामंडन करने के आरोप लगे थे।

उस समय मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि पुस्तकों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला पूरी तरह केंद्रीय गृह विभाग के अधिकार क्षेत्र में लिया गया था, जो उपराज्यपाल के नियंत्रण में आता है।

जेकेपीएफ का आरोप है कि "ग्रेट पर्सनैलिटीज एंड लेजेंड्स ऑफ जे एंड के (सीरीज-4)" शीर्षक वाली पुस्तक में Syed Ali Shah Geelani सहित अलगाववादी नेताओं और आतंकवाद से जुड़े व्यक्तियों को "महान व्यक्तित्व" के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

उल्लेखनीय है कि Unlawful Activities (Prevention) Act (यूएपीए) के तहत प्रतिबंधित संगठनों से संबंधित साहित्य का वितरण गंभीर आपराधिक आरोपों को जन्म दे सकता है। हालांकि, न्यायालयों ने अपने विभिन्न फैसलों में यह भी स्पष्ट किया है कि केवल किसी साहित्य का कब्जे में होना या उसका अस्तित्व पर्याप्त नहीं है; कार्रवाई के लिए यह साबित करना आवश्यक होता है कि उसका उद्देश्य या उपयोग गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा देना था।

 

With inputs from IANS