

कल्पेट्टा/तिरुवनंतपुरम। केरल के वायनाड जिले में अनक्कमपोयिल–कल्लाडी सुरंग सड़क परियोजना स्थल पर हुए भीषण मलबा धंसने की घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। मंगलवार को भी कई एजेंसियों की टीमें संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान में जुटी रहीं। अब भी चार लोगों के भारी मात्रा में मलबे के नीचे फंसे होने की आशंका है, जिनकी तलाश जारी है।
घटना में घायल हुए 10 लोगों का दो अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है। बचाव दल लगातार समय के खिलाफ दौड़ लगाते हुए मलबे में दबे लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।
मलबा धंसने से एक चर्च और उसके पास स्थित एक मकान भी बह गया। राहत की बात यह रही कि मकान के सभी सदस्य मक्का की तीर्थयात्रा पर गए हुए थे, जबकि हादसे के समय चर्च के अंदर भी कोई मौजूद नहीं था।
प्रभावित क्षेत्र को जोड़ने वाला एक पुल पूरी तरह मलबे में दब गया है, जिससे राहत एवं बचाव कार्य में भारी मुश्किलें आ रही हैं। रास्ता साफ करने और बचाव दलों की आवाजाही बहाल करने के लिए दो जेसीबी मशीनों से लगातार मलबा हटाया जा रहा है।
वायनाड से सांसद और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं और राज्य सरकार की सभी एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ काम कर रही हैं।

उन्होंने एक बयान में कहा कि मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन स्वयं बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं। पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और सिविल डिफेंस के स्वयंसेवकों को मौके पर तैनात किया गया है।
प्रियंका गांधी ने बताया कि जिला प्रशासन, मंत्री टी. सिद्दीक और ए.पी. अनिल कुमार, जो तिरुवनंतपुरम से वायनाड के लिए रवाना हो चुके हैं, स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर राहत कार्यों का समन्वय कर रहे हैं।
उन्होंने हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस कठिन समय में हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने कहा, "हमारी प्रार्थनाएं उन लोगों के साथ हैं जो अब भी लापता हैं। हमें उम्मीद है कि बचाव दल जल्द से जल्द उन तक पहुंचेगा और उनके परिवारों को इस कठिन समय में हिम्मत मिलेगी।"
प्रियंका गांधी ने संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के कार्यकर्ताओं, पार्टी पदाधिकारियों और आम लोगों से जिला प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए राहत एवं बचाव कार्यों में हरसंभव सहयोग करने की अपील की।
उन्होंने कहा, "ऐसे समय में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि राहत और बचाव अभियान में किसी प्रकार की बाधा न आए। सभी लोगों को बिना किसी व्यवधान के अपनी ओर से हरसंभव मदद करनी चाहिए।"
उधर, राहत अभियान युद्धस्तर पर जारी है। भारी मशीनों की मदद से विशाल मलबे को हटाकर लापता लोगों की तलाश की जा रही है।
यह हादसा कल्लाडी स्थित मीनाक्षी पुल के पास हुआ, जहां वायनाड की ओर से सुरंग सड़क परियोजना का निर्माण कार्य चल रहा है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि लगातार हो रही भारी बारिश के कारण निर्माण स्थल पर जमा खुदाई की गई मिट्टी का विशाल ढेर ढह गया, जिससे कार्यस्थल का बड़ा हिस्सा मलबे में दब गया।
पिछले 24 घंटों में मेप्पाडी क्षेत्र में 226 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिसके बाद यह दुर्घटना हुई।
यह इलाका एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है। घटना के समय वहां कई निजी वाहन और निर्माण श्रमिकों को लाने-ले जाने वाली एक बस खड़ी थी। आशंका है कि कुछ लोग अब भी मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं।
केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (केएसडीएमए) मुख्यालय में आपात समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करने के बाद मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने कहा कि लगातार बारिश के बावजूद बचाव अभियान जारी है, हालांकि खराब मौसम के कारण कार्य में कठिनाइयां आ रही हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार ने निर्माण कंपनी को पहले ही कई बार खुदाई से निकली मिट्टी को हटाने के निर्देश दिए थे। इस संबंध में 20 जून को औपचारिक सरकारी आदेश भी जारी किया गया था, लेकिन कंपनी ने उसका पालन नहीं किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राजस्व मंत्री ए.पी. अनिल कुमार और कृषि मंत्री टी. सिद्दीक को मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, घटनास्थल के लिए रवाना होने से पहले मंत्री टी. सिद्दीक ने मीडिया से कहा कि शुरुआती जांच में निर्माण स्थल पर खुदाई की गई मिट्टी को अवैज्ञानिक तरीके से जमा किए जाने की बात सामने आई है।
उन्होंने कहा, "प्रारंभिक आकलन से लगता है कि पहले भी चिंता जताए जाने के बावजूद मिट्टी को वैज्ञानिक तरीके से नहीं रखा गया। यह प्राकृतिक भूस्खलन नहीं, बल्कि मानवजनित आपदा है।" उन्होंने कहा कि सरकार यह भी जांच करेगी कि पहले दी गई चेतावनियों पर आवश्यक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
With inputs from IANS