
नई दिल्ली। परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलन का नेतृत्व करने वाले सीजेपी ने आरोप लगाया है कि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने के अपने वादे से पीछे हट रही है। संगठन का दावा है कि सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों का हवाला देकर अपने आश्वासनों को लागू करने से बच रही है। साथ ही, सीजेपी ने चेतावनी दी है कि यदि वादे पूरे नहीं किए गए तो वह एक बार फिर देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा।
सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने मंगलवार देर रात आईएएनएस से बातचीत में कहा कि केंद्र सरकार ने पहले सार्वजनिक रूप से आश्वासन दिया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ न तो नए एफआईआर दर्ज किए जाएंगे और न ही पुराने मामलों को जारी रखा जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार अब यह कह रही है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन (सब-ज्यूडिस) है, इसलिए वह कोई निर्णय नहीं ले सकती। दास के अनुसार, संगठन को उम्मीद थी कि मंगलवार तक सरकार इस संबंध में लिखित आश्वासन देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
सौरव दास का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि सरकार एफआईआर वापस नहीं ले सकती। उनके मुताबिक, एफआईआर वापस लेने का अधिकार सरकार के पास है और अदालत के आदेश की गलत व्याख्या कर छात्रों के हितों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार अपने वादों को पूरा नहीं करती है तो सीजेपी एक बार फिर उन छात्रों के समर्थन में सड़कों पर उतरेगा, जिनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
दास ने यह भी दावा किया कि उत्तर प्रदेश, गोवा, राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई और उत्पीड़न की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि संगठन शुरू से ही देशभर के सभी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को कानूनी संरक्षण देने और उनके खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने की मांग करता रहा है।
सीजेपी ने 20 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर से परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के विरोध में आंदोलन शुरू किया था। आंदोलन की प्रमुख मांगों में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी शामिल थी।
20 जुलाई को निकाले गए 'संसद मार्च' के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई थी। इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जबकि झड़पों में 118 से अधिक पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे।
बाद में केंद्र सरकार और सीजेपी के प्रतिनिधियों के बीच दो दौर की बातचीत हुई। इसके बाद संगठन ने अपना 37 दिनों तक चला आंदोलन समाप्त कर दिया था। सीजेपी का कहना है कि सरकार ने उस समय शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने और नीट पेपर लीक विवाद के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा देने का आश्वासन दिया था। अब संगठन का आरोप है कि उन वादों को पूरी तरह लागू नहीं किया जा रहा है।
With inputs from IANS