

New Delhi: संसद के दोनों सदनों से वंदे मातरम् बिल को मंजूरी मिल गई है. राज्यसभा में पारित होने के बाद गुरुवार को लोकसभा ने भी विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच इस विधेयक को पास कर दिया. अब यह बिल राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को भी कानूनी संरक्षण मिलेगा, जैसा वर्तमान में राष्ट्रगान जन-गण-मन को प्राप्त है. सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत की गरिमा बनाए रखना और उसके सम्मान को सुनिश्चित करना है. वहीं विपक्ष ने बिल को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं और सदन में विरोध प्रदर्शन किया. लोकसभा से पारित होने के साथ ही यह विधेयक कानून बनने की अंतिम संवैधानिक प्रक्रिया की ओर बढ़ गया है.
दोनों सदनों से मिली मंजूरी
वंदे मातरम् बिल को पहले राज्यसभा ने मंजूरी दी थी और इसके बाद लोकसभा ने भी इसे पारित कर दिया. सदन में चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने बिल का विरोध करते हुए हंगामा किया, लेकिन इसके बावजूद सरकार इसे पारित कराने में सफल रही. संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद अब यह विधेयक राष्ट्रपति के अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा. राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह कानून के रूप में लागू होगा.
कानून बनने पर क्या होंगे प्रावधान
विधेयक के कानून बनने के बाद राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को भी राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण मिलेगा. प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, वंदे मातरम् का जानबूझकर अपमान करना या उसके सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली गतिविधियां दंडनीय अपराध मानी जाएंगी. इसके अलावा किसी व्यक्ति को वंदे मातरम् गाने से रोकना या इसके गायन में बाधा डालना भी कानून के दायरे में आएगा. ऐसे मामलों में अधिकतम तीन वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है.
सरकार और विपक्ष के अलग-अलग रुख
सरकार का कहना है कि यह कानून राष्ट्रीय गीत के सम्मान और उसकी गरिमा की रक्षा के लिए लाया गया है. सरकार के अनुसार, राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बनाए रखना लोकतांत्रिक मूल्यों का हिस्सा है. दूसरी ओर, विपक्ष ने विधेयक के विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाते हुए संसद में विरोध दर्ज कराया. हालांकि विरोध के बावजूद विधेयक दोनों सदनों से पारित हो गया. अब सभी की नजर राष्ट्रपति की मंजूरी पर है, जिसके बाद यह कानून औपचारिक रूप से लागू हो सकेगा.
