

बिहार सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। अब सड़क हादसे के बाद इलाज के लिए अस्पताल ढूंढने या एंबुलेंस की व्यवस्था करने की चिंता नहीं होगी। पीड़ित या आसपास मौजूद कोई भी व्यक्ति सिर्फ डायल 112 पर कॉल करेगा, जिसके बाद पुलिस, एंबुलेंस और अस्पताल की पूरी व्यवस्था तुरंत शुरू कर दी जाएगी। साथ ही पात्र मरीजों को 1.5 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा भी मिलेगी।
यह व्यवस्था इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम (ERSS) के तहत लागू की गई है, जिसे नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के सिस्टम से जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को गोल्डन आवर के भीतर इलाज उपलब्ध कराना है, ताकि समय पर उपचार मिलने से अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके।
सड़क हादसा होने की स्थिति में सबसे पहले 112 पर कॉल करना होगा। कॉल मिलते ही सिस्टम नजदीकी अस्पताल और उपलब्ध एंबुलेंस की जानकारी देगा। आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय पुलिस भी तत्काल मौके पर पहुंचेगी और घायल को निकटतम अस्पताल पहुंचाकर इलाज शुरू कराया जाएगा। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित होगी, जिससे मरीज और उसके परिजनों को अनावश्यक औपचारिकताओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।
इस योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को प्रधानमंत्री राहत योजना के माध्यम से 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। मरीज या उसके परिवार को पहले कोई राशि जमा नहीं करनी होगी। अस्पताल तुरंत उपचार शुरू करेगा और भुगतान की प्रक्रिया बाद में तय नियमों के अनुसार पूरी की जाएगी।
बिहार पुलिस के एडीजी (ट्रैफिक) सुधांशु कुमार के अनुसार, सड़क हादसे के बाद का पहला एक घंटा यानी 'गोल्डन आवर' सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान यदि घायल को समय पर इलाज मिल जाए तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसी उद्देश्य से इस व्यवस्था को तेज, सरल और तकनीक आधारित बनाया गया है।
योजना का लाभ सड़क दुर्घटना के हर पीड़ित को मिलेगा। इसमें पैदल यात्री, साइकिल सवार, बाइक चालक, कार सवार और अन्य सभी वाहन दुर्घटनाओं के शिकार लोग शामिल हैं। यह सुविधा सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ आयुष्मान भारत योजना से जुड़े निजी अस्पतालों में भी उपलब्ध रहेगी।
पुलिस के अनुसार यह योजना 13 फरवरी 2026 से लागू है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण अब तक केवल 82 लोगों ने इसका लाभ उठाया है। इसलिए लोगों से अपील की गई है कि सड़क हादसा होने पर घबराने के बजाय तुरंत 112 पर कॉल करें।
सरकार ने गुड सेमेरिटन (Good Samaritan) नीति के तहत घायल की मदद करने वाले लोगों को भी कानूनी सुरक्षा प्रदान की है। यदि कोई व्यक्ति दुर्घटना पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने या उसकी सहायता करता है, तो उसे पुलिस कार्रवाई या कानूनी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से सड़क दुर्घटनाओं के बाद इलाज में होने वाली देरी कम होगी, घायलों को समय पर चिकित्सा मिलेगी, आर्थिक बोझ घटेगा और राज्य में सड़क हादसों से होने वाली मौतों में कमी लाने में मदद मिलेगी।
