





नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने स्पष्ट किया है कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए होने वाले सामान्य लेनदेन पर आम नागरिकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। प्रस्तावित शुल्क केवल व्यावसायिक (कॉमर्शियल) लेनदेन पर लागू होगा।
यह स्पष्टीकरण लोकसभा में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित होने के एक दिन बाद आया है। इस विधेयक के तहत सरकार को बैंकों और अन्य सेवा प्रदाताओं को UPI तथा अन्य अधिसूचित डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने की अनुमति देने का अधिकार मिलेगा।
भाजपा सांसद अशोक मित्तल ने कहा कि आम लोगों के लिए UPI पर किसी तरह का शुल्क नहीं लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा, "चार्ज केवल कुछ कारोबारी लेनदेन पर लागू होगा, आम उपभोक्ताओं के रोजमर्रा के डिजिटल भुगतान पर नहीं।"
भाजपा की बिहार इकाई के अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी लोगों की चिंताओं को दूर करने की कोशिश करते हुए कहा कि UPI ने देश में डिजिटल भुगतान की क्रांति लाई है और छोटे दुकानदारों से लेकर रेहड़ी-पटरी वालों तक सभी ने इसका लाभ उठाया है।

उन्होंने कहा कि अभी केवल कानून बनाया गया है। शुल्क कितना होगा, किन लेनदेन पर लगेगा और इसे कैसे लागू किया जाएगा, इसका फैसला बाद में नियम बनने के बाद किया जाएगा। इस संबंध में अंतिम निर्णय भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) करेंगे।
वहीं, जनता दल (यूनाइटेड) के एमएलसी नीरज कुमार सिंह ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि किसी भी भुगतान प्रणाली को लंबे समय तक सुचारु रूप से चलाने के लिए उसका आर्थिक रूप से टिकाऊ होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि कारोबारी लेनदेन पर मामूली शुल्क लगाया जाता है तो इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
हालांकि, विपक्ष ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक सतीश कुमार सिंह यादव ने आरोप लगाया कि सरकार अब हर चीज पर टैक्स लगाने की दिशा में बढ़ रही है और UPI पर शुल्क लगाने का प्रस्ताव भी उसी का हिस्सा है।
गौरतलब है कि लोकसभा में हंगामे के बीच बिना चर्चा के पारित इस संशोधन विधेयक का उद्देश्य उस कानूनी प्रावधान को हटाना है, जो फिलहाल बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को अधिसूचित डिजिटल भुगतान माध्यमों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वसूलने से रोकता है। सरकार का कहना है कि इससे डिजिटल भुगतान प्रणाली से जुड़े बैंकों और सेवा प्रदाताओं के लिए टिकाऊ राजस्व मॉडल तैयार किया जा सकेगा, जबकि आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा।
With inputs from IANS