राज्यसभा में Bankers’ Books Evidence Bill पास, विपक्ष के वॉकआउट के बीच 135 साल पुराने कानून की जगह लेगा नया कानूनBy Admin Mon, 10 August 2026 05:26 PM

राज्यसभा ने सोमवार को Bankers’ Books Evidence Bill, 2026 को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। विधेयक पर विस्तृत चर्चा शुरू होने से पहले ही विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। यह विधेयक 1891 के करीब 135 साल पुराने Bankers’ Books Evidence Act की जगह लेगा और बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े कानूनी साक्ष्यों के नियमों को डिजिटल दौर के अनुरूप बनाएगा।

दिन में कई बार स्थगित होने के बाद जब सदन दोबारा बैठा, तो उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से लोकसभा से पहले ही पारित हो चुके विधेयक को विचार के लिए पेश करने को कहा।

विधेयक पेश किए जाने के दौरान विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते रहे। उपसभापति ने विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से कहा कि उन्हें 1952 में बनाए गए सदन के नियमों के तहत बोलने का अवसर दिया जाएगा, लेकिन उनकी बात विधेयक तक सीमित रहनी चाहिए।

इस दौरान खड़गे और उपसभापति के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। विपक्ष की लगातार नारेबाजी के बीच सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी और विभिन्न दलों के सदस्यों ने विधेयक पर अपनी बात रखी।

क्यों जरूरी हुआ नया कानून?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विधेयक की जरूरत बताते हुए कहा कि 1891 में बनाया गया मूल कानून उस दौर की बैंकिंग व्यवस्था को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। उस समय बैंकिंग रिकॉर्ड मुख्य रूप से कागज और रजिस्टर के रूप में रखे जाते थे।

पुराने कानून का उद्देश्य बैंक रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रतियों को अदालत में सबूत के तौर पर इस्तेमाल करने की अनुमति देना था। इससे बैंक अधिकारियों को मूल रजिस्टर और दस्तावेज लेकर अदालतों में उपस्थित होने की जरूरत कम हो जाती थी।

लेकिन पिछले कुछ दशकों में बैंकिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। आज बैंकिंग रिकॉर्ड डिजिटल माध्यमों से तैयार, सुरक्षित और प्रबंधित किए जाते हैं। ऐसे में सरकार का मानना है कि बैंकिंग रिकॉर्ड को कानूनी साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल करने से जुड़े नियमों को भी आधुनिक तकनीक के अनुरूप बदलने की जरूरत है।

डिजिटल रिकॉर्ड के साथ प्राइवेसी पर जोर

निर्मला सीतारमण ने कहा कि नए कानून में ग्राहकों की गोपनीयता और जरूरी सुरक्षा उपायों का पूरा ध्यान रखा गया है। सरकार का उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक डिजिटल रिकॉर्ड के लिए स्पष्ट और मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना है।

विधेयक पर बोलने वाले कई सदस्यों ने भी कानून में तकनीकी बदलाव का स्वागत किया। हालांकि, उन्होंने डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा उपायों को लेकर भी सावधानी बरतने की जरूरत पर जोर दिया।

विपक्ष के विरोध के बीच हुआ पारित

विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्य लगातार विरोध और नारेबाजी करते रहे। इससे पहले दोपहर में भी सदन की कार्यवाही बाधित हुई थी। उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने वित्त मंत्री को बोलने के लिए बुलाने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण करीब दो मिनट के भीतर ही सदन को दोपहर 2.15 बजे तक स्थगित करना पड़ा।

बाद में सदन की कार्यवाही शुरू होने पर भी विपक्ष का विरोध जारी रहा और विस्तृत चर्चा से पहले विपक्षी सदस्य सदन से बाहर चले गए। इसके बाद विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

विधेयक पर बोलने वालों में AITC के मोहम्मद नदीमुल हक, BJP के अरुण सिंह, BJD के मानस रंजन मंगराज, YSRCP के एस. निरंजन रेड्डी, NCP के राजेंद्र हिरालाल जैन, TDP के भाष्यम राम कृष्ण, VRS के रवि चंद्र वड्डिराजू, DMDK के एल.के. सुधीश, AIADMK के डॉ. एम. धनपाल और शिवसेना की डॉ. ज्योति नागनाथ वाघमारे शामिल रहे।

डिजिटल बैंकिंग के दौर में बड़ा बदलाव

नया कानून ऐसे समय में आया है जब भारत की बैंकिंग व्यवस्था तेजी से डिजिटल हो रही है। इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के बढ़ते इस्तेमाल ने बैंकिंग दस्तावेजों की प्रकृति को पूरी तरह बदल दिया है।

ऐसे में पुराने कानून की जगह नया कानूनी ढांचा लागू होने से अदालतों में बैंकिंग रिकॉर्ड को इलेक्ट्रॉनिक रूप में पेश करने और उनके प्रमाणिक इस्तेमाल को लेकर व्यवस्था अधिक आधुनिक और व्यावहारिक होने की उम्मीद है।

सरकार के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यह सुनिश्चित करना होगी कि डिजिटल रिकॉर्ड को कानूनी मान्यता देने के साथ ग्राहकों की निजी और वित्तीय जानकारी की सुरक्षा भी मजबूत बनी रहे।

 

With inputs from IANS