झारखंड भर्ती घोटाले की जांच सीबीआई से कराने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, 24 अगस्त को होगी सुनवाई By Mid Time Bureau Fri, 21 August 2026 05:43 PM

NEW DELHI: 14वीं जेपीएससी (JPSC) प्रारंभिक परीक्षा और अन्य राज्य परीक्षाओं में कथित धांधली की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में मामले की जांच राज्य सीआईडी (CID) से लेकर सीबीआई (CBI) को सौंपने और ओएमआर शीट, सीसीटीवी फुटेज जैसे डिजिटल व फिजिकल सबूतों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 में कथित अनियमितताओं की CBI या स्वतंत्र जांच की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करेगा। सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने वकील सत्यम सिंह राजपूत के ज़रिए यह याचिका दायर की है। इसमें परीक्षा के आयोजन और मूल्यांकन में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए परीक्षा रद्द करने और दोबारा परीक्षा कराने की मांग की गई है। याचिका में सीबीआई  से स्वतंत्र, निष्पक्ष, व्यापक और समय-सीमा के भीतर जांच की मांग की गई है। PIL में कहा गया है कि 19 अप्रैल, 2026 को JPSC द्वारा आयोजित परीक्षा  में कथित अनियमितताओं की जांच की जाए। यह याचिका 2 जुलाई को प्रारंभिक परीक्षा के नतीजे घोषित होने के बाद हुए विवाद के बीच दायर की गई है। याचिका के अनुसार, बाद में एक सफल उम्मीदवार की OMR उत्तर पुस्तिका की कार्बन कॉपी वायरल हो गई, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे। इन कथित अनियमितताओं के कारण रांची में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए थे। याचिकाकर्ता का दावा था कि उम्मीदवार को योग्य दिखाया गया, जबकि उसने कथित तौर पर पेपर I के 100 में से केवल 48 सवालों के जवाब दिए थे। CBI जांच के अलावा, याचिका में एक स्वतंत्र समिति बनाने की मांग की गई, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज या झारखंड के बाहर के किसी हाई कोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस/जज करें। याचिका में कहा गया है कि प्रस्तावित समिति में फोरेंसिक साइंस, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, परीक्षा सुरक्षा, OMR मूल्यांकन, साइबर सुरक्षा और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के एक्सपर्ट शामिल होंगे। याचिकाकर्ता ने OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और रिजल्ट-जनरेशन सिस्टम के स्वतंत्र ऑडिट की भी मांग की है, और यह तय करने को कहा है कि क्या गड़बड़ियों से कथित तौर पर प्रभावित उम्मीदवारों को निष्पक्ष रूप से "दागी" और "बेदाग" श्रेणियों में बांटा जा सकता है। याचिका में JPSC, सरकारी अधिकारियों और सभी एजेंसियों, कॉन्ट्रैक्टरों, सर्विस प्रोवाइडरों को निर्देश देने की भी मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह कोर्ट द्वारा मंज़ूर सुरक्षा उपायों के तहत एक नई प्रारंभिक परीक्षा कराने का आदेश दे। झारखंड हाई कोर्ट ने 20 अगस्त को राज्य सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके तहत 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षाओं के ज़रिए नियुक्त सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति रद्द कर दी गई थी। कथित अनियमितताओं को लेकर हफ़्तों तक चले सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शन के बाद, झारखंड सरकार ने 18 अगस्त को एक नोटिफिकेशन जारी करके 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षाओं सहित 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया था। कोर्ट का यह आदेश सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ नवनियुक्त अधिकारियों द्वारा दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आया।

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