JPSC-JSCC नियुक्ति घोटाला : सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार, केंद्र सरकार व अन्य को जारी किया नोटिस By Mid Time Bureau Mon, 24 August 2026 02:04 PM

NEW DELHI: JPSC और JSCC नियुक्ति घोटाले को लेकर दाखिल याचिका पर सोमवार सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। याचिका पर सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है. याचिकाकर्ता ने अनियमितताओं की जांच CBI या निष्पक्ष SIT से करवाने की मांग की है. याचिकाकर्ता ने 19 अप्रैल 2026 को हुई परीक्षा रद्द कर नए सिरे से परीक्षा की मांग की थी. हालांकि, इस मांग पर आज अधिक चर्चा नहीं हुई. सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की तरफ से आज सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील मनन कुमार मिश्रा पेश हुए. उन्होंने कोर्ट को बताया कि JPSC और कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर छात्र लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. मनन मिश्रा ने मामले की सीबीआई जांच या सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में गठित एसआईटी को सौंपने का अनुरोध किया है.
चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने क्या कहा
3 जजों की बेंच की अध्यक्षता कर रहे चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि पूर्व जज सिर्फ जांच की निगरानी कर सकते हैं. जांच की विशेषज्ञता पेशेवर जांच एजेंसी के पास ही होती है. इसमें फोरेंसिक जांच की भी जरूरत होती है. जजों ने कहा कि झारखंड में न्यायिक सेवा की नियुक्ति में गड़बड़ियों का भी मामला चर्चा में है और यह सब बहुत ही चिंता का विषय है. याचिकाकर्ता के वकील ने जजों को जानकारी दी कि राज्य सरकार ने जेपीएससी परीक्षा रद्द की थी, लेकिन हाई कोर्ट ने उस पर रोक लगा दी है. 
झारखंड सरकार को नोटिस जारी
आखिरकार, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड सरकार को नोटिस जारी कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट में मौजूद राज्य सरकार के वकील ने नोटिस स्वीकार कर लिया. कोर्ट ने कहा कि वह प्रतिवादियों का जवाब देखने के बाद आगे की सुनवाई करेगा.


परीक्षा की पूरी प्रक्रिया पर उठे सवाल
JPSC की परीक्षा को लेकर झारखंड में लंबे समय से विवाद चल रहा है. अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं. इसी बीच राज्य में JPSC और JSSC की विभिन्न परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन भी तेज हुआ. राज्य सरकार ने कथित परीक्षा अनियमितताओं से जुड़ी जांच और छात्रों के आंदोलन के बीच कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था. सरकार के फैसले में JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाओं समेत कई भर्ती परीक्षाएं शामिल थीं.
हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में मामला
इस विवाद में पिछले सप्ताह झारखंड हाईकोर्ट से भी बड़ा घटनाक्रम सामने आया था. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा तथा उनसे हुई नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले पर रोक लगा दी थी. इससे उन अभ्यर्थियों को राहत मिली, जिनकी नियुक्ति रद्द होने का खतरा पैदा हो गया था. हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में JPSC की 2025 प्रारंभिक परीक्षा को लेकर स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई हुई है. ऐसे में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब और महत्वपूर्ण हो गई है.
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब केंद्र सरकार, झारखंड सरकार और संबंधित पक्षों का जवाब महत्वपूर्ण होगा. अदालत यह देखेगी कि JPSC की 2025 प्रारंभिक परीक्षा में लगाए गए अनियमितता के आरोपों पर स्वतंत्र जांच की जरूरत है या नहीं. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के नोटिस को परीक्षा रद्द करने का आदेश नहीं माना जा सकता. यह याचिका में उठाए गए आरोपों और स्वतंत्र जांच की मांग पर संबंधित पक्षों से जवाब लेने की प्रक्रिया है. उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार याचिका का मुख्य जोर परीक्षा रद्द कराने के बजाय कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच पर है. यानी झारखंड के JPSC-JSSC विवाद में एक तरफ हाईकोर्ट से रद्द नियुक्तियों को लेकर अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ JPSC की 2025 प्रारंभिक परीक्षा की कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग अब सुप्रीम कोर्ट के सामने है.

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