गंगा में पलटी जर्जर नाव, उजड़ गए कई परिवार! बच्चों की मौत से दहला राघोपुरBy Mid Time Bureau Wed, 14 October 2026 01:39 PM

बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में गंगा नदी पर हुए नाव हादसे ने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी है। हाजीपुर नाव दुर्घटना में 14 बच्चों की मौत की खबर से पूरे इलाके में शोक का माहौल है। इस हादसे में एक ही परिवार के 13 बच्चों की जान जाने की बात सामने आई है, जिसने इस त्रासदी को और भी दर्दनाक बना दिया है। जिन घरों में कभी बच्चों की हंसी और किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब अपनों को खोने का मातम पसरा है।

इस हादसे के बाद एक मां की बेबसी और दर्द का दृश्य भी सामने आया। अपने बच्चों को खोने के गम में वह खुद को संभाल नहीं पा रही थी। बताया गया कि वह जिलाधिकारी वर्षा सिंह से लिपटकर रोने लगी। उस मां के लिए अपने बच्चों को खोने का दुख कितना गहरा होगा, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।

श्राद्ध का भोज खाने गए थे बच्चे, लौटते समय हुआ हादसा

जानकारी के मुताबिक, बच्चे नाव से पास के गांव में श्राद्ध का भोज खाने गए थे। लेकिन वापस लौटते समय गंगा नदी में उनकी नाव पलट गई और कई बच्चे हादसे का शिकार हो गए। प्रत्यक्षदर्शी रवि यादव के अनुसार, नाव पर बच्चे सवार थे और उसे भी बच्चे ही चला रहे थे। इस दुर्घटना ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है।

राघोपुर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है, जहां नाव लोगों के लिए आवागमन का एक अहम साधन है। कई गांवों के लोग नदी पार करने के लिए नाव पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में इस हादसे ने नावों की सुरक्षा, उनकी स्थिति और बच्चों की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हादसे के बाद नाव में मिला बड़ा छेद

दुर्घटना के बाद राहत और बचाव अभियान में जुटी एसडीआरएफ की टीम ने गंगा नदी में पलटी नाव को बाहर निकाला। जांच के दौरान नाव के एक हिस्से में बड़ा छेद दिखाई दिया। प्रत्यक्षदर्शी रवि यादव ने दावा किया कि गांव में उपलब्ध सरकारी नाव काफी पुरानी और जर्जर हालत में थी। स्थानीय लोगों ने भी नाव की खराब स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं।

राघोपुर के पूर्व विधायक और भाजपा नेता सतीश राय ने भी नाव की जर्जर स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित इस इलाके में गांव के लोगों के लिए उपलब्ध कराई गई नाव कई साल पुरानी है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

गंगा नदी में हुए इस हादसे के बाद अब नावों की हालत, उनकी नियमित जांच और सुरक्षित परिचालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के दावों के बीच नाव में मिले छेद और बच्चों द्वारा नाव चलाए जाने की बात भी जांच के अहम पहलू हैं। हालांकि, हादसे की परिस्थितियों और इसकी वजहों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

फिलहाल, इस दुर्घटना ने कई परिवारों को ऐसा दुख दिया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। एक तरफ अपनों को खोने का गम है, तो दूसरी तरफ यह सवाल भी है कि अगर नाव की सुरक्षा और बच्चों की निगरानी को लेकर पर्याप्त सावधानी बरती गई होती, तो क्या इस दर्दनाक हादसे को टाला जा सकता था?