नीला ड्रम केस में मुस्कान और साहिल को फांसी, फैसला सुनते ही दोनों की आंखों से छलके आंसूBy Mid Time Bureau Wed, 14 October 2026 04:52 PM

Meerut: मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड यानी नीला ड्रम केस में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत में बुधवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई। फैसला सुनाए जाने के दौरान दोनों आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जेल से अदालत के सामने पेश हुए।
सजा सुनते ही मुस्कान भावुक हो गईं। जेल प्रशासन के मुताबिक, फैसले के वक्त उन्होंने हाथ जोड़ रखे थे और बाद में रोने लगीं। वहीं साहिल शुक्ला की आंखें भी नम हो गईं। सुनवाई के दौरान मुस्कान ने अपनी दो बेटियों का जिक्र करते हुए उनके भविष्य और देखभाल को लेकर चिंता जताई।

सजा से पहले अदालत ने दोनों को दिया आखिरी मौका

सजा सुनाए जाने से पहले अदालत ने दोनों से पूछा कि क्या वे कुछ कहना चाहते हैं। दोनों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अलग-अलग अदालत के सामने पेश किया गया। अदालत की ओर से अपनी बात रखने का अवसर दिए जाने पर दोनों ने कहा कि उन्हें कुछ नहीं कहना है। लंच के बाद दोनों को दोबारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया और इसके बाद अदालत ने सजा का ऐलान किया। सीनियर जेल सुपरिटेंडेंट वीरेश राज शर्मा के अनुसार, फैसले से पहले दोनों काफी बेचैन नजर आ रहे थे। जेल प्रशासन के मुताबिक, उन्होंने रात और सुबह खाना भी कम खाया और ठीक से सो नहीं पाए।

मुस्कान ने बेटियों के भविष्य की चिंता जताई

मुस्कान पिछले कुछ दिनों से अपनी बड़ी बेटी से मिलने की इच्छा जता रही थीं। जेल अधीक्षक के मुताबिक, बड़ी बेटी की उम्र करीब सात साल है, लेकिन उसे जेल में मुस्कान से मिलवाने के लिए नहीं लाया गया। सजा पर बहस के दौरान बचाव पक्ष ने भी मुस्कान की दोनों बेटियों के भविष्य और उनकी परवरिश का मुद्दा अदालत के सामने रखा। अधिवक्ता रेखा जैन ने इसी आधार पर अदालत से सजा में नरमी बरतने की अपील की। दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता और वारदात के तरीके को देखते हुए दोनों के लिए अधिकतम सजा यानी मृत्युदंड की मांग की।

हत्या के बाद शव को नीले ड्रम में छिपाने का आरोप

अभियोजन के मुताबिक, मुस्कान ने अपने पति सौरभ राजपूत की हत्या में साहिल शुक्ला के साथ मिलकर भूमिका निभाई। आरोप है कि हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें एक नीले ड्रम में डालकर सीमेंट से बंद कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद नीले ड्रम में शव मिलने की वजह से यह हत्याकांड देशभर में चर्चित हो गया था।

गुमशुदगी की शिकायत से खुली वारदात की परतें

पुलिस के अनुसार, 18 मार्च 2025 को सौरभ के भाई बबलू ने उनके लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में मुस्कान और साहिल पर संदेह जताया गया था। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और पूछताछ के साथ अलग-अलग साक्ष्यों को जोड़ना शुरू किया। जांच आगे बढ़ने पर घर से नीले ड्रम में छिपाया गया सौरभ का शव बरामद हुआ। इसके बाद पुलिस ने मामले से जुड़े फॉरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए।

चश्मदीद नहीं, परिस्थितिजन्य और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों पर टिकी जांच

मामले में कोई प्रत्यक्ष चश्मदीद गवाह नहीं होने के कारण पुलिस ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ इलेक्ट्रॉनिक और फॉरेंसिक सबूतों की कड़ियां जोड़ीं। जांच में कैब चालक के बयान, होटल से जुड़े रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज के अलावा मोबाइल की कॉल डिटेल, लोकेशन और फॉरेंसिक रिपोर्ट को भी अहम माना गया।
अभियोजन पक्ष ने अदालत में इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी ठहराते हुए दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई।