
कोलंबो — इस मुकाबले में गति थी, तीक्ष्णता थी और सबसे बढ़कर अनुशासन था।
जब भारत का सामना पाकिस्तान से आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप के ग्रुप मैच में रविवार को हुआ, तो यह सिर्फ एक हाई-वोल्टेज मुकाबला नहीं था, बल्कि आधुनिक क्रिकेट में उत्कृष्टता का शानदार प्रदर्शन था। भारतीय टीम ने मैदान पर हर पहलू में अपनी तैयारी और संतुलन का परिचय दिया। तेज रिफ्लेक्स, दबाव में सटीक प्रदर्शन और बेहतरीन तालमेल के साथ भारत ने यह मैच 61 रनों से जीत लिया।
इस मुकाबले में अंतर छोटे-छोटे पलों में साफ नजर आया। गेंद को पकड़ने का तरीका, उसे तुरंत थ्रो करने की गति और हर गेंद के बीच खिलाड़ियों की तत्परता—हर मूवमेंट में उद्देश्य और स्पष्ट रणनीति दिखाई दी।
मैदान पर भारत का अनुशासन अद्भुत रहा। फील्डर चीते की तरह गेंद पर झपटते दिखे, कोणों को काटते हुए तेज थ्रो करते रहे। सिंगल रन लेना मुश्किल हो गया और डबल लेने में जोखिम बढ़ गया। पाकिस्तान के बल्लेबाज कभी सहज होकर खेल ही नहीं सके।
जहां बल्लेबाजों ने प्रतिस्पर्धी स्कोर खड़ा करने का काम किया, वहीं फील्डरों का योगदान भी उतना ही प्रभावशाली रहा। आधुनिक टी20 क्रिकेट में फील्डिंग के जरिए 10-15 रन बचाना उतना ही महत्वपूर्ण होता है, जितना उन्हें बनाना। भारत ने इस बात को सबसे बेहतर तरीके से समझा।
आज की भारतीय टीम खेल विज्ञान के प्रभावी उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण नजर आती है। रिकवरी साइकल, फुर्ती बढ़ाने वाले अभ्यास और रिएक्शन ट्रेनिंग—सब कुछ सुनियोजित और लक्ष्य आधारित दिखाई देता है। इसका श्रेय भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को जाता है, जिसने टीम को तकनीकी, पेशेवर और आर्थिक स्तर पर पूर्ण सहयोग उपलब्ध कराया है।
उच्च स्तरीय सपोर्ट स्टाफ, उन्नत विश्लेषण प्रणाली और फिटनेस कार्यक्रमों ने टीम को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है, जिसका परिणाम मैदान पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
जब पाकिस्तान ने लक्ष्य का पीछा शुरू किया तो दबाव लगातार बढ़ता गया। डॉट गेंदों की संख्या बढ़ती रही, फील्डरों ने घेरा कस दिया और तेज थ्रो ने आसान रन बनने नहीं दिए। स्कोरबोर्ड का दबाव लगातार बना रहा।
भारत-पाकिस्तान जैसे बड़े मुकाबलों में मानसिक मजबूती कौशल जितनी ही महत्वपूर्ण होती है। भारत ने लगातार दबाव बनाए रखा और अंततः पाकिस्तान की टीम उस दबाव के सामने टिक नहीं सकी।
फिलहाल भारतीय टीम क्रिकेट की निर्विवाद बादशाह नजर आती है। वह केवल खराब दिन पर ही हार सकती है, क्योंकि जब टीम पूरी तरह तैयार, अनुशासित और एकजुट होकर खेलती है, तब उसका मुकाबला करना बेहद कठिन हो जाता है।
यह सिर्फ एक जीत नहीं थी, बल्कि तैयारी और पेशेवर उत्कृष्टता का मजबूत संदेश भी था।
साथ ही यह याद दिलाता है कि आधुनिक क्रिकेट में सफलता केवल बल्ले और गेंद से नहीं, बल्कि फिटनेस, एकाग्रता और बेहतरीन फील्डिंग से हासिल होती है।
With inputs from IANS