
नई दिल्ली। जब भारत और वियतनाम के बीच खेले गए मुकाबले में दूसरे हाफ में बतौर सब्स्टीट्यूट मैदान पर उतरीं सनफिदा नोंगरुम ने 52वें मिनट में गोल दागा, तो यह सिर्फ एक गोल नहीं था। यह एएफसी महिला एशियन कप ऑस्ट्रेलिया 2026 में भारत की गोल के साथ वापसी का संकेत भी था और अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक नए चेहरे के आगमन की घोषणा भी।
हालांकि, इंजरी टाइम में हुए गोल के कारण भारत को ग्रुप-सी के अपने पहले मैच में वियतनाम के खिलाफ 1-2 से हार का सामना करना पड़ा।
बुधवार को हुए इस मुकाबले से पहले भारत ने एएफसी महिला एशियन कप में आखिरी बार 23 साल पहले गोल किया था। खास बात यह है कि उस समय सनफिदा का जन्म भी नहीं हुआ था। अपने सीनियर अंतरराष्ट्रीय डेब्यू मैच में ही 20 वर्षीय खिलाड़ी ने दूसरे हाफ के शुरुआती मिनटों में गोल कर इतिहास रच दिया और एशियन कप में भारत के लिए 23 साल बाद पहला गोल दागा।
हालांकि, इस उपलब्धि के साथ हार का दुख भी जुड़ा रहा।
मैच के बाद सनफिदा ने कहा, “अपने डेब्यू मैच में भारत के लिए पहला गोल करके मैं खुश हूं, लेकिन आखिरी पलों में मिली हार से दुख भी है। हम इस मैच से सीख लेंगे और जापान के खिलाफ अगले मुकाबले की तैयारी करेंगे।”
पर्थ में डेब्यू गोल करने से काफी पहले सनफिदा की फुटबॉल यात्रा मेघालय के शिलांग से शुरू हुई थी। वह एक संयुक्त परिवार में पली-बढ़ीं, जहां उनके माता-पिता, दादी और चचेरे भाई-बहन साथ रहते थे। फुटबॉल से उनका परिचय उनके चचेरे भाई ने कराया।
उन्होंने याद करते हुए कहा, “मैंने शुरुआत में घर पर अपने चचेरे भाई के साथ खेलना शुरू किया था। इसके बाद हम रोज मैदान में जाकर साथ दौड़ते और खेलते थे।”
करीब पांच-छह साल की उम्र तक यह खेल उनकी रोजमर्रा की दिनचर्या बन चुका था। इसके बाद लगभग छह साल की उम्र में उन्होंने शिलांग के रॉयल वाहिंगडोह एफसी अकादमी से जुड़कर संगठित फुटबॉल की शुरुआत की। हालांकि शुरुआत में उन्हें औपचारिक चयन के लिए थोड़ा छोटा माना गया, लेकिन वहां के माहौल ने उन्हें फुटबॉल की बुनियादी समझ दी।
इसके बाद उन्होंने स्थानीय प्रतियोगिताओं के जरिए आगे बढ़ना शुरू किया। वह जिला और राज्य स्तर के युवा टूर्नामेंटों में मेघालय का प्रतिनिधित्व करने लगीं और साथ ही हफ्ते में कई बार नियमित प्रशिक्षण भी लेती रहीं।
उन्होंने कहा, “मेरा ज्यादातर समय ट्रेनिंग और मैचों में ही गुजरता था। मुझे जहां भी मौका मिलता, मैं खेलती थी—चाहे जिला स्तर हो या राज्य स्तर।”
घर से बाहर पहली बड़ी प्रतियोगिता का अनुभव उन्हें 12 साल की उम्र में मिला, जब वह अपने स्कूल की ओर से सुब्रतो कप खेलने गईं। यह पहली बार था जब फुटबॉल उन्हें शिलांग से बाहर ले गया। दो साल बाद उन्होंने ओडिशा में आयोजित सब-जूनियर गर्ल्स नेशनल फुटबॉल चैंपियनशिप में मेघालय का प्रतिनिधित्व किया।
उनके करियर में बड़ा मोड़ तब आया जब वह महज 15 साल की थीं।
उन्होंने कहा, “मैं पहली बार गंभीरता से फुटबॉल खेलने के लिए घर से बाहर गई। मैं बेंगलुरु पहुंची और यह मेरे लिए बहुत बड़ा पल था।”
बेंगलुरु में उन्होंने बेंगलुरु यूनाइटेड एफसी जॉइन किया, जहां उन्होंने पूर्व भारतीय गोलकीपर चित्रा गंगाधरन के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया। यह पहली बार था जब वह घर से दूर रहकर अधिक पेशेवर माहौल में खेल रही थीं।
कर्नाटक में दो साल बिताने के बाद सनफिदा ने इंडियन विमेंस लीग में अनुभव हासिल करना शुरू किया। उन्होंने 2021-22 सत्र में भुवनेश्वर में आयोजित आईडब्ल्यूएल में गोवा के सिरवोदम स्पोर्ट्स क्लब के लिए खेला। इसके बाद अगले सत्र में अहमदाबाद में स्पोर्ट्स ओडिशा का प्रतिनिधित्व किया।
बाद में वह गढ़वाल यूनाइटेड एफसी से जुड़ीं, जहां उनके करियर ने नई दिशा पकड़ी। समय के साथ वह टीम की सबसे वरिष्ठ अकादमी खिलाड़ियों में शामिल हो गईं और बाद में नेतृत्व की जिम्मेदारी भी संभाली।
उनकी कप्तानी में 2024-25 सत्र में गढ़वाल यूनाइटेड ने आईडब्ल्यूएल-2 का खिताब जीता। इसके बाद दिसंबर 2025 में उन्होंने लंबी दूरी से शानदार गोल दागकर क्लब को इंडियन विमेंस लीग में पहली जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
उनकी इस लगातार प्रगति के पीछे परिवार का मजबूत समर्थन रहा है। उनके पिता ड्राइवर हैं और मां गृहिणी हैं। शिलांग से दूर रहने के बावजूद परिवार का हौसला हमेशा उनके साथ रहा।
सनफिदा ने कहा, “मेरे परिवार ने हमेशा एक ही बात कही है—कभी हार मत मानो। फुटबॉल में आप जीत सकते हैं, हार सकते हैं या ड्रॉ हो सकता है, लेकिन सबसे जरूरी है आगे बढ़ते रहना और मेहनत करते रहना।”
With inputs from IANS