2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी से युवाओं को मिलेगा बड़ा मंच: मीराबाई चानूBy Admin Sun, 02 August 2026 08:45 PM

नई दिल्ली: लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाली ओलंपिक रजत पदक विजेता मीराबाई चानू ने कहा है कि वर्ष 2030 में भारत में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स देश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बनेंगे और खेलों के प्रति उनका उत्साह बढ़ाएंगे।

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिला 48 किलोग्राम भार वर्ग में रिकॉर्ड प्रदर्शन के साथ स्वर्ण पदक जीतने वाली मीराबाई ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि भारत में इन खेलों के आयोजन से नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने कहा, "सबसे खुशी की बात यह है कि 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भारत करेगा। इससे युवा पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने का मौका मिलेगा और अधिक खिलाड़ी खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होंगे।"

अपने अब तक के सफर को याद करते हुए मीराबाई ने परिवार के सहयोग को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि मणिपुर से राष्ट्रीय शिविर तक पहुंचने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करने के रास्ते में कई चुनौतियां आईं, लेकिन परिवार हमेशा उनके साथ मजबूती से खड़ा रहा।

उन्होंने कहा, "मेरी यात्रा में बहुत उतार-चढ़ाव आए, लेकिन मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं कि मेरे परिवार ने हर कदम पर मेरा साथ दिया। खिलाड़ियों के लिए ऐसा समर्थन बहुत मायने रखता है।"

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31 वर्षीय स्टार भारोत्तोलक ने खिलाड़ियों के जीवन में आने वाली मानसिक और शारीरिक चुनौतियों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि खेलों में अच्छे और बुरे दौर आते रहते हैं और बड़े टूर्नामेंट से पहले चोट लगना किसी भी खिलाड़ी के लिए सबसे कठिन समय होता है।

मीराबाई ने कहा, "कभी ट्रेनिंग अच्छी होती है तो कभी नहीं। ऐसे समय में मन में कई सवाल आते हैं। सबसे बड़ी चुनौती चोट होती है, जो अक्सर बड़े मुकाबलों की तैयारी के दौरान लगती है। ऐसे हालात में मजबूत मानसिकता बनाए रखना बेहद जरूरी है। मेहनत, त्याग और अनुशासन ही खिलाड़ी को आगे बढ़ाते हैं।"

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मीराबाई ने शुरुआती स्नैच प्रयास में असफल रहने के बाद शानदार वापसी करते हुए 85 किलोग्राम का रिकॉर्ड स्नैच और 105 किलोग्राम क्लीन एंड जर्क उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ वह लगातार तीन कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पहली भारोत्तोलक बन गईं और देश की महानतम खिलाड़ियों में अपनी जगह और मजबूत कर ली।

 

With inputs from IANS