




मनीला। भारतीय एरोबिक जिम्नास्ट एरिहा पंगामबाम के लिए एशियाई एरोबिक जिम्नास्टिक्स चैंपियनशिप में जीता गया स्वर्ण पदक सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि पिछली निराशा का जवाब भी है। पिछले संस्करण में मामूली अंतर से पदक से चूकने वाली 19 वर्षीय एरिहा ने इस बार शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया।
एरिहा एशियाई चैंपियनशिप के सीनियर महिला व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाली **पहली भारतीय जिम्नास्ट** बन गई हैं। फिलीपींस में आयोजित फाइनल में उन्होंने कुल **19.100 अंक** हासिल किए। इसमें आर्टिस्ट्री के लिए 8.650, एक्जीक्यूशन के लिए 7.600 और डिफिकल्टी के लिए 2.850 अंक शामिल रहे।
अपनी ऐतिहासिक जीत के बाद एरिहा ने आईएएनएस से कहा, **“उस समय मैं भावनाओं से पूरी तरह भर गई थी। यह पदक मेरे लिए बहुत मायने रखता है, क्योंकि मैं सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए पदक जीतना चाहती थी।”**
पिछली एशियाई चैंपियनशिप में एरिहा चौथे स्थान पर रही थीं और कुछ अंकों के मामूली अंतर से पदक से चूक गई थीं। उस नतीजे ने उन्हें काफी निराश किया, लेकिन यही निराशा आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा बनी।
उन्होंने कहा, **“पिछली एशियाई चैंपियनशिप में मैं कुछ ही अंकों से चौथे स्थान पर रही थी। मुझे इसका बहुत अफसोस हुआ। तभी मैंने सोच लिया था कि अगली बार मुझे पदक जरूर जीतना है।”**


हालांकि, एरिहा के लिए सिर्फ पदक जीतना ही लक्ष्य नहीं था। वह चाहती थीं कि उनकी प्रस्तुति को देखने वाले दर्शक और जज उनके प्रदर्शन के पीछे की भावना को समझ सकें।
उन्होंने कहा, **“एक परफॉर्मर के तौर पर मैं हमेशा चाहती थी कि जज और दर्शक यह समझें कि मैं अपनी प्रस्तुति के जरिए क्या कहना चाहती हूं। मैंने इसे मंच पर उतारने की कोशिश की और शायद यही वजह रही कि मुझे यह पदक मिला।”**
इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे एरिहा की कड़ी मेहनत भी रही। वह रोजाना करीब **छह घंटे अभ्यास** करती थीं, जिसमें सुबह और शाम के सत्र शामिल थे।
एरिहा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच और माता-पिता को भी दिया। उन्होंने कहा, **“मैं रोजाना करीब छह घंटे ट्रेनिंग करती हूं, सुबह और शाम दोनों सत्र होते हैं। लेकिन सिर्फ मेरी मेहनत ही नहीं, मेरे कोच और माता-पिता का भी इसमें बहुत बड़ा योगदान है। उनके बिना मैं यहां तक नहीं पहुंच पाती।”**
एरिहा के स्वर्ण पदक के साथ भारतीय एरोबिक जिम्नास्टिक्स ने भी एक नया अध्याय लिखा है। एशियाई चैंपियनशिप के 10 संस्करणों के इतिहास में यह भारत का इस स्पर्धा में **पहला स्वर्ण पदक** है।
50 सदस्यीय भारतीय दल के प्रमुख इंदरजीत सिंह राठौर ने इसे भारतीय जिम्नास्टिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने आईएएनएस से कहा, **“यह बहुत बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि यह 10वीं एशियाई चैंपियनशिप है। जिम्नास्टिक्स में इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था कि हमारे स्वर्ण जीतने पर राष्ट्रगान बजाया गया हो। यह हमारे लिए बहुत बड़ा पल है।”**
राठौर का मानना है कि इस सफलता से भारत में एरोबिक जिम्नास्टिक्स को नई पहचान मिल सकती है। उन्होंने कहा कि यह खेल अभी देश में ज्यादा लोकप्रिय नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धियां मिलने से बच्चों और अभिभावकों में इसके प्रति रुचि बढ़ेगी।
उन्होंने कहा, **“इसके बाद जिम्नास्टिक्स में काफी सुधार देखने को मिलेगा। यह अभी इतना जाना-पहचाना खेल नहीं है, लेकिन जब इस तरह का स्वर्ण और बड़ी उपलब्धियां मिलती हैं तो बच्चे और उनके माता-पिता इस खेल को अपनाने के लिए प्रेरित होते हैं। हमें इसके भविष्य को लेकर काफी उम्मीद है।”**
राठौर ने बताया कि भारतीय टीम करीब एक दशक से इस तरह की सफलता के लिए लगातार काम कर रही थी। कोविड के बाद भी खिलाड़ियों ने कड़ी मेहनत जारी रखी। एरिहा ने युवा स्तर से ही इस खेल में अपनी पहचान बनाई और अब सीनियर स्तर पर भी शानदार प्रदर्शन कर रही हैं।
भारत के लिए इस चैंपियनशिप में एक और पदक भी आया। टीम ने **सीनियर एयरो स्टेप वर्ग में कांस्य पदक** जीता। इस तरह भारत ने प्रतियोगिता का समापन एक स्वर्ण और एक कांस्य पदक के साथ किया।
एरिहा के लिए हालांकि यह स्वर्ण पदक केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है। यह पिछली चैंपियनशिप में चौथे स्थान पर रहने की कसक, वर्षों की मेहनत और मंच पर अपनी भावनाओं को प्रदर्शन के जरिए व्यक्त करने के उनके जुनून का नतीजा है। साथ ही, यह भारतीय एरोबिक जिम्नास्टिक्स के लिए एक नई शुरुआत भी माना जा रहा है।
With inputs from IANS

