एशियन एज ग्रुप चेस चैंपियनशिप में भारत की अंडर-11 लड़कियों ने जीता कांस्यBy IANS Thu, 20 August 2026 11:34 AM

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भारतीय अंडर-11 बालिका टीम ने सिंगापुर के टैम्पाइन्स हब में आयोजित एशियन एज ग्रुप चेस चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में लगातार अच्छा खेल दिखाया और एशिया के मजबूत युवा खिलाड़ियों के बीच अपनी क्षमता साबित की।

भारतीय टीम में आंध्र प्रदेश की वरेण्या लक्ष्मी वका और अलिगिरी अमृता हेमल के अलावा मुंबई की माया सिद्धार्थ नरूला शामिल थीं। माया मुंबई चेस सेंटर (एमसीसी) का प्रतिनिधित्व करती हैं। भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 14.5 अंक हासिल किए।

वियतनाम ने 19.5 अंकों के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि मेजबान सिंगापुर ने भी 14.5 अंक हासिल किए। भारत के समान अंक होने के बावजूद टूर्नामेंट के टाई-ब्रेक नियमों के आधार पर सिंगापुर को रजत और भारत को कांस्य पदक मिला।

मंगलवार रात समाप्त हुए इस चैंपियनशिप में 27 देशों के 700 से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय भागीदारी ने प्रतियोगिता को क्षेत्र के प्रमुख जूनियर शतरंज आयोजनों में शामिल कर दिया।

भारतीय खिलाड़ियों ने अलग-अलग दौर में दबाव के बीच संयम बनाए रखा और कई मुकाबलों में मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी चुनौती दी। टीम का प्रदर्शन इस बात का संकेत भी है कि भारत में जूनियर स्तर पर शतरंज का आधार लगातार मजबूत हो रहा है और युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तेजी से तैयार हो रहे हैं।

मुंबई चेस सेंटर के मुख्य कोच दुर्गा नागेश गुट्टुला ने टीम के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय खिलाड़ियों ने चैंपियनशिप में शानदार खेल दिखाया और जूनियर शतरंज की मजबूती तथा गहराई को एक बार फिर साबित किया।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग आयु वर्ग और स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता उत्साहजनक है। उनके मुताबिक, इस तरह की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से युवा खिलाड़ियों को मजबूत विरोधियों के खिलाफ खेलने का अनुभव मिलता है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे भविष्य में बड़े मंचों के लिए बेहतर तरीके से तैयार होते हैं।

भारत का जूनियर शतरंज में प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत रहा है। विभिन्न आयु वर्गों में भारतीय खिलाड़ियों ने महाद्वीपीय और वैश्विक स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीते हैं। क्लासिकल के साथ-साथ रैपिड और ब्लिट्ज प्रारूपों में भी भारतीय प्रतिभाओं ने अपनी पहचान बनाई है।

अंडर-11 टीम का यह कांस्य पदक इसी मजबूत जूनियर शतरंज व्यवस्था की एक और उपलब्धि है और आने वाले वर्षों में इन खिलाड़ियों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद बढ़ाता है।