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भारत के युवा ग्रैंडमास्टर प्रणेश एम ने हंगरी के नाग्यकनिज्सा में आयोजित प्रतिष्ठित कनिज्सा ओपन 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ग्रुप ए का खिताब अपने नाम कर लिया। 19 वर्षीय प्रणेश ने टूर्नामेंट के नौ राउंड में सात अंक हासिल किए और बेहतर टाईब्रेक के आधार पर चैंपियन बने।
रविवार को खेले गए नौवें और अंतिम राउंड में प्रणेश ने जर्मनी के वादिम पेट्रोव्स्कीय को सफेद मोहरों से मात दी। इस जीत के साथ उन्होंने सात अंकों के साथ टूर्नामेंट का समापन किया। हालांकि चार खिलाड़ी समान सात अंकों पर रहे, लेकिन बेहतर टाईब्रेक के कारण प्रणेश को पहला स्थान मिला।
इजराइल के ओर ब्रोनस्टीन, यूक्रेन के आंद्रेई वोलोकिटिन और भारत के कार्तिक वेंकटरमण भी सात अंकों के साथ संयुक्त रूप से शीर्ष पर रहे। टाईब्रेक के आधार पर ब्रोनस्टीन दूसरे, वोलोकिटिन तीसरे और कार्तिक चौथे स्थान पर रहे।
कार्तिक वेंकटरमण के पास सीधे खिताब जीतने का मौका था, लेकिन अंतिम राउंड में वोलोकिटिन के खिलाफ उनका मुकाबला ड्रॉ रहा। वहीं, ब्रोनस्टीन ने अपने हमवतन आईएम बेनी आइजेनबर्ग को हराकर शीर्ष समूह में जगह बनाई।
कनिज्सा ओपन में प्रणेश की सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें ग्रुप ए में 226 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। अगस्त 2026 की नवीनतम फिडे रैंकिंग में 2673 रेटिंग के साथ प्रणेश दुनिया में 44वें स्थान पर हैं। तमिलनाडु के कराईकुडी से आने वाले प्रणेश ने कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की है और उनकी यह जीत भारतीय शतरंज की नई पीढ़ी की बढ़ती ताकत को दर्शाती है।
हंगरी स्थित भारतीय दूतावास ने भी प्रणेश की उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी। दूतावास ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर उन्हें भारतीय शतरंज का नया चैंपियन बताते हुए कहा कि नाग्यकनिज्सा में आयोजित मध्य यूरोप के सबसे प्रतिस्पर्धी ओपन टूर्नामेंटों में से एक में भारतीय प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला।
टूर्नामेंट में अन्य भारतीय खिलाड़ियों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। नीलाश साहा 6.5 अंकों के साथ 10वें स्थान पर रहे। नितिश बेलुरकर 6 अंक लेकर 20वें, अजय संतोष पार्वथारेड्डी 21वें और भट्टाचार्य सोहम 23वें स्थान पर रहे।
प्रणेश की यह जीत ऐसे समय में आई है जब भारतीय शतरंज लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। युवा खिलाड़ियों के लगातार बेहतर प्रदर्शन से भारत के पास आने वाले वर्षों में विश्व शतरंज में अपनी स्थिति और मजबूत करने की उम्मीद बढ़ी है।
