ओलंपिक में भारत की भागीदारी बढ़ाने पर पीएम मोदी का जोर, कहा- हर खेल में तैयार करने होंगे खिलाड़ीBy IANS Thu, 27 August 2026 02:18 PM

Photo: IANS

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओलंपिक खेलों में भारत की भागीदारी का दायरा बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि देश को उन खेलों में भी प्रतिभाओं को तैयार करना होगा, जिनमें अब तक भारतीय खिलाड़ियों की मौजूदगी बेहद कम रही है। उन्होंने कहा कि 2036 ओलंपिक की तैयारियों के लिए केवल खेल ढांचे को मजबूत करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि अलग-अलग खेलों के लिए संभावित खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें शुरुआती उम्र से प्रशिक्षण देना भी जरूरी है।

गुरुवार को ‘खेलो इंडिया डायलॉग’ के दौरान युवाओं को वर्चुअली संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत लंबे समय से ओलंपिक के कई खेलों में हिस्सा नहीं ले रहा है। इसका सीधा असर देश के पदक प्रदर्शन पर पड़ता है, क्योंकि जिन खेलों में भारत की भागीदारी ही नहीं होती, वहां पदक जीतने का सवाल भी नहीं उठता।

पीएम मोदी ने कहा, “सच्चाई यह है कि भारत की टीमें ओलंपिक में शामिल आधे खेलों में हिस्सा नहीं लेती हैं।” उन्होंने बताया कि 2012 के ओलंपिक में भारत ने केवल 13 खेलों में भाग लिया था, जबकि 20 से अधिक खेल ऐसे थे जिनमें देश की भागीदारी नहीं थी।

उन्होंने कहा कि भारत को पदक तालिका में बेहतर प्रदर्शन के लिए केवल पारंपरिक रूप से मजबूत खेलों पर निर्भर रहने के बजाय नए खेलों में भी अपनी पहचान बनानी होगी। प्रधानमंत्री ने सर्फिंग और स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग जैसे खेलों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की भौगोलिक विविधता इन खेलों के लिए प्रतिभा तलाशने का बड़ा अवसर देती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के पास लंबा समुद्री तट, विशाल पर्वतीय क्षेत्र और अलग-अलग तरह का भौगोलिक परिवेश है। ऐसे में जल क्रीड़ा, पर्वतीय खेल और विंटर स्पोर्ट्स जैसी विधाओं के लिए प्रतिभाओं को स्थानीय स्तर पर तलाशकर आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में प्राकृतिक क्षमता होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की मौजूदगी अभी बहुत सीमित है।

उन्होंने जिला स्तर पर अलग-अलग खेलों के लिए विशेष इकोसिस्टम तैयार करने की जरूरत बताई। इसके तहत स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप खेल सुविधाएं, प्रशिक्षण और प्रतिभा विकास की व्यवस्था तैयार की जा सकती है। इससे छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के खिलाड़ियों को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।

2036 ओलंपिक की तैयारियों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश का ध्यान ऐसे खिलाड़ियों को तैयार करने पर होना चाहिए, जो भविष्य में अलग-अलग खेलों में क्वालीफाई कर भारत का प्रतिनिधित्व कर सकें। उनके मुताबिक, इसके लिए प्रतिभा की पहचान जितनी जल्दी हो, उतना बेहतर परिणाम हासिल किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से घोषित राष्ट्रव्यापी टैलेंट हंट का भी उल्लेख किया। इस अभियान के तहत 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों की खेल प्रतिभा तलाशने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि बच्चा किस खेल में रुचि रखता है, बल्कि यह भी समझना जरूरी है कि उसकी शारीरिक क्षमता और प्रतिभा किस खेल के लिए अधिक उपयुक्त है।

उन्होंने कहा, “हमें यह तय करना है कि कौन सा बच्चा किस खेल के लिए उपयुक्त है और उसी के अनुसार उसे प्रशिक्षण देना है।” इससे कम उम्र में सही खेल का चुनाव करने और प्रतिभाओं को व्यवस्थित तरीके से विकसित करने में मदद मिल सकती है।

पीएम मोदी ने युवा खिलाड़ियों को भरोसा दिलाया कि खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए उन्हें आवश्यक सरकारी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए और सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।

भारत के लिए 2036 ओलंपिक की मेजबानी की दावेदारी के संदर्भ में प्रधानमंत्री का यह जोर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। व्यापक खेल भागीदारी, शुरुआती उम्र में प्रतिभा की पहचान और जिला स्तर पर खेल इकोसिस्टम तैयार करने से भारत को उन खेल विधाओं में भी प्रतिस्पर्धी बनाने की कोशिश की जा रही है, जहां अब तक उसकी उपस्थिति सीमित रही है।

 

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